Mohammad shahbuddin की पूरी कुंडली नहीं जानिए

एक अपराधी और एक नेता, मोहम्मद शाहबुद्दीन जिसकी कल कोरोना की वजह से जेल में मौत हुई गई है. आज उसके समर्थक सोशल मीडिया पर जस्टिस ​फार शाहबुद्दीन ट्रेंड करा रहे हैं. उनका आरोप है कि छोटा राजन को तुरंत ट्रीटमेंट दिया गया, लेकिन कोरोना से पीड़ित शाहबुद्दीन को जेल में कोई ट्रीटमेंट नहीं मिला.

हालांकि, इसी ट्रेंड में कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यही सच्चा सेक्यूलरिज्म है. जो कल तक मशहूर पत्रकार रहे रोहित सरदाना की मौत पर जश्न मना रहे थे, वो आज एक अपराधी के लिए ट्वीटर पर यह ट्रेंड करा रहे हैं कि शाहबुद्दीन को न्याय ​मिले. इसके अलावा इस ट्रेंड का विरोध कर रहे लोगों ने ये कुछ मीम्स भी इस हैशटैग पर पोस्ट किए हैं.

चलिए अब बताते हैं मोहम्मद शाहबुद्दीन आखिर था कौन

मोहम्मद शाहबुद्दीन राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी की पार्टी का नेता था. बिहार की सिवान कॉन्स्टीट्येंसी से सांसद भी बन चुका है. लालू प्रसाद यादव का बेहद करीबी था, लेकिन कम्यूनिस्ट पार्टी के छोटे लाल गुप्ता के किडनेपिंग और लापता करने के मामले में शाहबुद्दीन की सदस्यता अयोग्य घोषित कर दी गई थी. इसके लिए वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था.

इसके अलावा कई और अपराधों में मोहम्मद शाहबुद्दीन रहा है. इसके खिलाफ पूर्व छात्र नेता चंद्रशेखर प्रसाद सहित कम्युनिस्ट पार्टी के 15 अन्य कार्यकर्ताओं की हत्या का भी आरोप था। साल 2001 में शाहबुद्दीन ने दो पुलिसकर्मी और आठ अन्य लोगों को ​​एक अग्निकांड में मार दिया था. मामला दरअसल ये था कि बिहार की स्थानीय पुलिस आरजेडी की एक इकाई के अध्यक्ष को गिरफ्तार करने की गई थी, जिस पर शाहबुद्दीन ने पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मार दिया था और उसके गुंडों ने सरेआम बाकी पुलिस बल को भी पीटा. पुलिस ने अन्य सुरक्षाबल का इंतजाम किया, तो शाहबुद्दीन और उसके गुंड़ों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें दो पुलिसकर्मी और आठ अन्य लोग मारे गए थे. उसके गुंडों ने तीन पुलिस जीप को भी आग के हवाले कर दिया था. हालांकि, शाहबुद्दीन वहां से भाग गया, लेकिन घटना स्थल से तीन एके 47 समेत कई हथियार बरामद हुए थे.

शाहबुद्दीन पर यह भी आरोप लगा है कि साल 2000 की शुरूआत में वो अपने संसदीय क्षेत्र में एक पेरेलल सरकार चलाता था, जोकि शरिया कानून के मुताबिक चलाई जा रही थी. साल 2004 के लोकसभा चुनावों से आठ महीने पहले उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जेल में रहकर भी उसे वही आजादी थी, जो एक आम इंसान को बाहर रहकर महसूस होती है.

शाहबुद्दीन साल 2004 का चुनाव जेल से ही आपरेट करता है और ​आसानी से जीत भी जाता है. पार्टी वही होती है, लालू प्रसाद यादव की, जिसे आज उसके बेटे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव चला रहे हैं. इन चुनावों के बाद विपक्षी पार्टी नितिश कुमार की जेडीयू के नौ पार्टी कार्यकर्ता भी मार दिए जाते हैं, जिसका सीधा सीधा आरोप शाहबुद्दीन पर ही लगता है.

अप्रैल 2005 में, बिहार के प्रतापपुर में शहाबुद्दीन के घर पर जिला मजिस्ट्रेट और बिहार पुलिस ने एक छापेमारी की थी. इस छापेमारी में उसके घर से एके -47 और सेना के इस्तेमाल वाले कई अन्य हथियार भी मिले थे. रात में देखने वाले चश्मे से लेकर लेजर वाली बंदूकें तक शामिल थीं. कुछ हथियार ऐसे भी मिले थे जिन पर मेड इन पाकिस्तान के निशान थे.

उस वक्त बिहार पुलिस प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया था कि शहाबुद्दीन का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ संबंध है। इसके बाद, शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने के लिए आठ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। लेकिन उस वक्त लालू प्रसाद यादव के साथ के संबंध शाहबुद्दीन के काम आए और उसे तीन महीने तक बिहार पुलिस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल गिरफ्तार नहीं कर पाई.

हालांकि, नवंबर 2005 में शाहबुद्दीन को दिल्ली में उसके आधिकारिक आवास से गिरफ्तार कर लिया गया. शाहबुद्दीन के उपर 30 से ज्यादा अपराधिक मामले थे, जिनमें से आठ हत्या के और 20 हत्या के प्रयास, अपहरण, जबरन वसूली जैसे मामले भी शमिल थे.

अपराधों पर लिप्त इस नेता ने एक बार न्यायधीश को भी खत्म करने की धमकी थी. इसके अलावा उसने एक बार जेलर संजीव कुमार को भी धमकी दी थी कि तड़पा तड़पा के मारेंगे. हम तुम्हें धीरे-धीरे मौत के घाट उतार देंगे.

आशा करता हूं कि शाहबुद्दीन के गुंडई और आपराधिक छवि से वाकिफ होने के लिए यह जानकारी आपके लिए उपयुक्त रही होगी. बाकी खबरों को देखते रहने के लिए समाचार ​लाइव हिंदी से जुड़े रहिए. नमस्कार

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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