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दिल्ली के दिल में पान के स्वाद अनेक

पान का कैसा स्वाद चखना चाहेंगे जनाब? यह सवाल उन लोगों के लिए जरूर अटपटा होगा, जो सिर्फ एक ही तरह के पान का शौक फरमाते हैं। लेकिन उनके लिए नहीं, जो आए दिन एक नए स्वाद का पान खाते हैं। दरअसल, पान भले ही एक है लेकिन अब पान में इतनी वैरायटी आपको मिल जाएंगी, जिन्हें आप खाते-खाते थक जाएंगे।

गांव-कस्बों में आज भी पान में दो ही पान मशहूर हैं- सादा और मीठा। हां, बनारसी तो पान के शौकीन लोगों की पहली पसंद है। लेकिन भारत के कई शहरों में कई मशहूर पान की दुकानों पर पान की वैरायटी की भरमार है। बनारसी, सादा, मीठा जैसे पान के अलावा चॉकलेट पान, स्ट्राबैरी, पाइन एप्पल और बटर स्कॉच में भी पान मिल रहे हैं और इनका फ्लेवर भी मार्केट में काफी खूब टेस्ट किया जा रहा है। इसके अलावा क्रश आइस यानी बर्फ को पीस कर बनाया जाने वाला पान भी मार्केट में अच्छी खासी डिमांड में है।

चॉकलेट के अलावा कई और फ्लेवर

पान की दुकानों पर चॉकलेट फ्लेवर वाला पान काफी समय से पॉपुलर है। लेकिन अब स्ट्राबैरी, पाइन एप्पल, बटर स्कॉच, वनिला जैसे आइसक्रीम के फ्लेवर पान भी मार्केट में काफी डिमांड में है। इनकी कीमत मार्केट में 30 से 50 रुपये के बीच है। इनकी चाहत रखने वाले और कोई नहीं यूथ है, जो रेगुलर पान की बजाय इन पान का शौक फरमाते हैं। दरअसल, इसमें कुछ भी ऐसा नहीं होता, जिससे शरीर को कोई नुकसान हो।

आइस और फ्रोजन है सबसे खास
दिल्ली में पान की वैरायटी रखने वालों पर आइस और फ्रोजन नाम के पान सबसे अधिक सेल हो रहे हैं। इनकी डिमांड गर्मी में सबसे ज्यादा है। दिल्ली के कनॉट प्लेस के पान के दुकानदार ने बताया कि फ्रोजन पान में वही चीजें डाली जाती हैं, जो मीठा पान में डालते हैं। लेकिन पीस कर बर्फ डालने से यह पान आइस व फ्रोजन पान बन जाते हैं। इनमें बर्फ को मशीन से पीस मिलाकर डाला जाता है, जिसके बाद ग्राहक को दिया जाता है। आइस पान क्यूं फ्रोजन पान से अलग है? तो पान वाले ने जवाब दिया कि आइस पान में फ्रोजन से दोगुनी बर्फ डाली जाती है, जिसे खाने के बाद अंदर से पूरा मुंह आइस की तरह जम जाता है और पान का असर कई घंटे तक रहता है। दोनों पान की कीमत 40 से 60 रुपये के बीच है।

इन्हें खिलाने का है कुछ अलग तरीका

बनारसी हो या फिर सादा, हर किसी पान को पहले पाना वाला बनाता है और हाथ में पकड़ाता है, जिसके बाद आप उसे खाते हैं। यह तो सदियों से चला आ रहा एक ट्रेडिशनल तरीका है। लेकिन आइस और फ्रोजन पान को आप अपने हाथों से नहीं बल्कि पान वाले के हाथों से खाना पड़ता है। यानी पान वाला खुद मुंह खुलवाकर आपको यह पान खिलाता है। सोचने में लगेगा कि ऐसा क्यूं किया जाता है। इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि उसे आप खुद इसलिए नहीं खा सकते, क्योंकि पान को पकड़कर एक साथ मुंह में डालना पड़ता है। ऐसे में अगर पान वाला कस्टमर को पान देता है, तो वह खुल जाएगा। पान वाले ने बताया कि यह पान झटके से मुंह में डाला जाता है। क्योंकि शुरूआत में मुंह बर्फ की ठंडक को बर्दाशत नहीं कर पाता। लेकिन कुछ सैकेंड तक मुंह में रखने के बाद नॉर्मल हो जाता है।

कहां- कहां मिलते हैं यह खास पान

दिल्ली के कई इलाकों में यह पान मिलते हैं, लेकिन कुछ खास दुकान जहां पर पान की कई वैरायटी मिलती हैं, उनमें दरयागंज का प्रिंस पान भंडार, कनॉट प्लेस का ओडियन मिलन पान, यमू पंचायत पान, नॉर्थ अवेन्यू की पांडे पान शॉप, जनपथ पर गरीब पान भंडार हैं।

Image source: www.eatoutsdelhi.net

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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