तलत महमूद, कंपकपाती मखमली आवाज का जादू

तलत महमूद का नाम आते ही एक ऐसी सुरीली आवाज का स्मरण हो आता है, जिसका वाकई कोई सानी नहीं था। एक ऐसी सुरीली और कुछ कंपकपाती हुई सी मखमली आवाज जिसका जादू आज भी कायम है। आज भी नई पीढ़ी तक उनके गाए गाने और गजल चाव से सुनती है।

24 फरवरी, 1924 को लखनऊ में मंजूर महमूद के बेटे के रूप में जन्मे तलत को गाने और एक्टिंग के शौक के लिए अपने परिवार का विरोध सहना पड़ा और घर और फिल्म में से एक को चुनने को कहा गया। तलत ने भी अपने शौक को सर्वोपरि रखा।

15-16 साल की उम्र में ही 1939 में लखनऊ रेडियो पर गालिब, मीर, दाग, जिगर आदि की गजलें गाकर तलत मशहूर हो चुके थे। उनकी आवाज को रिकॅर्डिंग कंपनी एचएमवी ने सुना और 1941 में ही उनकी पहली डिस्क बाजार में उतार दी। 1940 के दशक में कोलकाता भी फिल्म नगरी के रूप में विख्यात था। वह कोलकाता पहुंच गए और चूंकि वह एक बेहद हैंडसम इंसान थे, इसलिए वहां हिंदी के अलावा बंगाली फिल्मों में भी गायक के अलावा हीरो के रूप में छा गए। उन्होंने बांग्ला फिल्मों के लिए अपना नाम तपन कुमार रख लिया था।

1949 में जब वह फिल्म नगरी मुंबई पहुंचे तो वहां उनका नाम पहले से ही पहुंच चुका था। म्यूजिक डायरेक्टर अनिल विश्वास उनके मुरीद बन चुके थे और उन्हें बेटे की तरह प्यार करते थे। अनिल विश्वास ने तलत से कई अविस्मरणीय गाने गवाए। इसी तरह नौशाद सहित अन्य टॉप म्यूजिक डायरेक्टर्स ने भी उनसे गाने गवाए। वह हीरो के रूप में भी छा गए और श्यामा, मधुबाला, नूतन, सुरैया, माला सिन्हा आदि के साथ काम किया और गाने गाए। वह पहले ऐसे गायक थे जो विदेश में भी अपने शो करने गए और ईस्ट अफ्रीका, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज, अमेरिका आदि में उनके फैंस ने उन्हें सिर माथे पर बिठाया। 1991 में तलत ने अपना आखिरी विदेशी शो हालैंड में किया था।

1992 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया। वैसे एक बार की घटना उनके साथ काफी रोचक घटी। वह यह कि फिल्म ‘बैजू बावरा’ में उन्हें गाना-गाना था। पर उस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद ने उन्हें स्टूडियो में सिगरेट पीते देख लिया और उनके साथ काम करना ही बंद कर दिया। यह दूरी करीब 16 साल रही, जिससे उनका काफी नुकसान हुआ। दूसरे वह खुद काफी खुद्दार थे और कई गाने खुद ही गाने से मना कर देते थे। इसलिए उनके गानों की संख्या काफी कम रह गई, पर जो भी गाने हैं, और वह भी कोई बहुत कम नहीं हैं, अमूल्य धरोहर हैं। उनकी मृत्यु 9 मई, 1998 को हुई थी।

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