“Syed Modi Murder Case” की पूरी कहानी

कहते हैं, प्यार में सब जायज है. लेकिन जो यह कहते हैं, वो ये नहीं बताते कि प्यार में किसी की जिंदगी लेना बिल्कुल भी जायज नहीं है. आज हम आपको एक ऐसे इंसान के प्यार की दास्तां सुनाने जा रहे हैं, जो लगातार आठ साल बैडमिंटन का चैंपीयन रहा और नौंवी बार जब वो जीत नहीं पाया, तो उसका कुछ ही वक्त बाद कत्ल कर दिया गया. नमस्कार मैं हूं त्रिभुवन शर्मा और आपका स्वागत है समाचार लाइव के सैग्मेंट क्राइम सीन में.

आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं, वो शख्स बैडमिंटन का बहुत बड़ा प्लेयर था. इनका नाम था सयैद मोदी. पैशे से बैडमिंटन के बड़े अच्छे प्लेयर थे और साल 1980 से 1987 के बीच लगातार हर साल नेशनल बैडमिंटन चैंपयिनशिप जीतते रहे. इनका नाम उस वक्त चर्चा में आया, जब इन्होंने साल 1982 कॉमनवेल्थ गैम्स में जीत हासिल की. सैयद को साल 1981 में अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था. वे लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे, लेकिन साल 1988 में उनकी पर्सनल लाइफ में एक ऐसा मोड़ आता है जिसका असर उनके खेल पर पड़ा. वो साल 1988 की नेशनल बैडमिंटन चैंपयिनशिप हार गए.

पुरानी अखबारों की कटिंग बताती हैं कि सैयद मोदी की पत्नी के अफेयर की खबर ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था. सैयद मोदी चैंपयिनशिप हार गए थे, तो दूसरी ओर उनकी ​निजी जिंदगी भी मानों ठहर गई थी.

साल 1978 में सैयद मोदी चाइना जा रही टीम का हिस्सा बनते हैं. वहीं उनकी मुलाकात एक बैडमिंटन प्लेयर से होती है, जिसका नाम होता है अमीता कुलकर्नी. सैयद मोदी और अमीता के बीच दोस्ती हो जाती है और यह दोस्ती कब प्यार में बदल जाती है, उन्हें खुद पता ही नहीं चलता.

लेकिन एक चीज जो उनके बीच हमेशा बनी रहती है, वो होती है एक दूसरे के खेल से जेलस महसूस करना. इतना ही नहीं, एक दूसरे के खेल में कमी निकालने के कारण कई बार उनके बीच झगड़ा भी हो जाता है, जिस कारण उनके परिवार वाले उनकी शादी करने को मना भी करते हैं, लेकिन ये दोनों उस वक्त नहीं मानते और रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर शादी कर लेते हैं.

यहां तक तो फिर भी सब ठीक चल रहा था. जैसे जैसे वक्त बढ़ता गया, दोनों के बीच समझ कम होती चली गई. सीबीआई की एक​ रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के बीच धर्म को लेकर भी विवाद रहता था और सबसे खास बात, दोनों के बीच तीसरे व्यक्ति का दखल सबसे बड़ी मुसिबत का कारण बन गया था, जो आखिरी में सैयद मोदी की मौत पर जाकर खत्म हुआ. वो तीसरा आदमी कौन था, उसे भी अब आपको बताते हैं.

शादी के बीच कई नामसमझीयों के अलावा संजय सिंह नाम के शख्स की एंट्री होती है. संंजय सिंह को आप यूं जान सकते हैं कि वो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दोस्त और क्लासमेट होने के साथ साथ उत्तरप्रदेश के अमेठी ​लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी जीत चुके हैं.

सैयद अमीता और संजय सिंह की नजदीकियों की वजह से परेशान रहने लगे थे. जब ​अमीता घर में नहीं होती थीं, तो कई बार वो अमीता की पर्सनल डायरी भी पढ़ते थे. अमीता को जब इस बात का पता चलता, तो अमीता इस बात से नाराज होकर जान बूझकर उसमें सैयद के साथ के संबंधों पर बुरा भी लिखती थीं और संजय सिंह के साथ अपने संबंधों की भी जानकारी लिखती थीं.

यह जानकारी तब सामने आई, जब पुलिस को वो डायरी हाथ लगी. अमीता को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उन्होंने बताया कि वो जान बूझकर यह सब लिखती थीं ताकि सैयद परेशान रहे. मैं इतनी भी बैवकूफ नहीं हूं कि मैं डायरी इसलिए लिखूं कि सीबीआई मेरे खिलाफ मजबूत केस बना सके.

सीबीआई के अनुसार, अमीता जब प्रैग्नेंट हुईं तो सैयद उस वक्त खुलकर अमीता का विरोध करने लगे थे. वो मानते थे कि वह बच्चा उनका नहीं है और वह सिंह के साथ अफेयर होने की वजह से प्रैग्नेंट हुई हैं. इस झगड़े के बाद अमीता अपने मां बाप के पास चली जाती हैं, जहां मई 1988 में उनकी बेटी अकांक्षा का जन्म होता है.

बेटी के दो महीनें बाद 28 जुलाई 1988 के दिन सैयद मोदी की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है. यह तब होता है, जब सैयद लखनउ के केडी सिंह बैडमिंटन स्टेडियम से प्रेक्टिस करने के बाद बाहर आ रहे थे. सैयद दीपिका पादूकोण के पिता प्रकाश पादूकोण की तरह ही मशहूर थे. यह मर्डर दुनिया के अखबारों में सुर्खियां बन गया था.

सीबीआई ने सैयद मोदी के मर्डर केस में उनकी पत्नी अमीता और अमीता के दोस्त संजय सिंह के खिलाफ चार्जशिट दाखिल की. हालांकि, कुछ ही समय बाद संजय सिंह और अमीता के उपर से केस ड्रॉप कर दिया गया और बाद में वे दोनों बरी हो गए.

इस मामले में कई और लोगों को भी पकड़ा गया था, जिसमें दो आरोपी कानून के फैसले से पहले ही मर गए, जबकि बाकी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. जबकि भगवती सिंह नाम के शख्स को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

मामला ठंडा पड़ने के बाद अमीता ने संजय सिंह के साथ शादी की और संजय सिंह ने अपनी पहली पत्नी गरीमा सिंह को तलाक दे दिया. उस वक्त संजय सिंह और अमीता की शादी अखबारों के फ्रंट पेज की खबर थी. आरोप लगाया जाता है कि उस वक्त की सरकार ने केस में छेड़खानी करते हुए संजय सिंह और अमीता कुलकर्नी को निर्दोष साबित करवा दिया था.

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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