NightBulb-Hindi-story, article, poem, blog: Baccho Ko Sikhaiye Jhooth Bolna:

बच्चों को सिखाइए झूठ बोलने की कला, वजह सुनकर रह जाएंगे हैरान!

आमतौर पर झूठ बोलने पर मां-बाप से डांट ही पढ़ती है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका बच्चा झूठ बोले। लेकिन आप यह बात सुनकर हैरान रह जाएंगे कि एक ताजा रिसर्च में पता चला है कि झूठ बोलने की कला सिखने से बच्चों का विकास होता है। आइए जानते हैं कि रिसर्च में ओर क्या- क्या रोचक बात कही गई है।

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झूठ बोलने से बढ़ती है सीखने-समझने की शक्ति

यूनिवर्सिटी ऑफ टोंरटो द्वारा की गई रिसर्च में पता चला है कि झूठ बोलने से बच्चों की सीखने, समझने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही, उनका दिमाग आम बच्चों की तुलना में तेजी से चलता है। यह रिसर्च 42 बच्चों पर की गई, जिनमें आधे बच्चों को संयम में रखा गया, जबकि आधे बच्चों को सामान छुपाने के लिए झूठ बोलने की कला सिखाई गई।

5 साल तक के बच्चों पर किए सर्वे से मिली जानकारी

इन बच्चों की उम्र 40 महीने यानी करीब साढ़े तीन साल थी, जिसमें बच्चों को अपने से बड़े बच्चों से चार दिन के लिए खाने-पीने की चीजें जैसे चॉकलेट, चिप्स, पॉपकॉर्न आदि को छुपाकर रखना था। छुपाकर रखने में कामयाब होने वाले बच्चों को पार्टी दी जाती थी। रिसर्च खत्म होने के बाद देखा गया कि संयम में रहने वाले बच्चों की तुलना में झूठ बोलने व चकमा देने वाले बच्चों ने गेम काफी रचनात्मक तौर पर खेला था।

दिमागी शक्ति और समस्या सुलझाने के लिए झूठ बोलने की कला है जरूरी

रिसर्च कहती है कि कुछ तौर-तरीके सीखाने मात्र से ही बच्चे चकमा देने की कला फुर्ती से सीख जाते हें। हालांकि, रिसर्च यह भी मानती है कि वैसे तो इसका इंसान के सामाजिक बर्ताव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, लेकिन इसके जरिए वे समस्या सुलझाने, दिमागी शक्ति और सामने वाले को समझने की कला में भी सफलता मिलती है। इसका सबसे अधिक असर पांच साल तक के बच्चे में सबसे अधिक होता है।

खुद से झूठ बोलना सीखने वाले बच्चे होते हैं ज्यादा समझदार

रिसर्च के लेखक कांग ली कहते हैं कि शुरूआत से ही झूठ बोलने वाले बच्चे और बाद में झूठ बोलना सीखने वाले बच्चों में जमीन-आसमान का अंतर होता है। जो बच्चे शुरूआत से ही झूठ बोलने लगते हैं, उनकी समझने, सीखने की कला अधिक होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को झूठ बोलने की कला हर माता-पिता को सिखानी चाहिए। दरअसल, ज्यादातर बच्चों में झूठ बोलने की कला 5 साल से पहले ही शुरू हो जाती है।

Image source: www.gov.mt.com
Content source: www.dailymail.co.uk

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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