दिल्ली में मेट्रो का निर्माण आसान नहीं था।

  • शाहदरा नहीं, वेलकम से शुरू होता मेट्रो नेटवर्क

मेट्रो के लिए पहला स्टेशन ही उसके लिए बड़ा चैलेंज साबित हुआ था। भले ही 25 दिसंबर 2002 को दिल्ली में पहली मेट्रो शाहदरा से तीस हजारी मेट्रो स्टेशन के बीच चली थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेट्रो को शाहदरा स्टेशन के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। शाहदरा मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो के पास जमीन की परेशानी सामने आ खड़ी थी। कुछ परिवार यहां बसे हुए थे और उन्हें हटाना मुश्किल था। ऐसे में समय बीतता जा रहा था। मेट्रो की मानें तो इन परिवार को हटाने के लिए दिल्ली सरकार का काफी सहयोग मिला और कम समय होने के बावजूद डीएमआरसी ने डेडलाइन के भीतर मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया। मेट्रो के अधिकारी ने बताया कि अगर वह फैमिली यूनिट नहीं हटतीं, तो मेट्रो के इतिहास में शाहदरा नहीं वेलकम मेट्रो स्टेशन का नाम दर्ज होता।

  • 41 महीने में तैयार किया था बदरपुर कॉरीडोर

दिल्ली मेट्रो की उपलब्धियों में बदरपुर कॉरीडोर का नाम सबसे आगे है। केंद्रीय सचिवालय से बदरपुर बॉर्डर तक मेट्रो कॉरीडोर को बनाने के लिए डीएमआरसी को सिर्फ 41 महीने का वक्त मिला था। इस लाइन की कुल लंबाई 20.16 किलोमीटर थी, जिसपर कुल 16 मेट्रो स्टेशन बनाकर तैयार करने थे। इसके अलावा एक डिपो भी मेट्रो को तैयार करना था। डीएमआरसी के मुताबिक, एक मेट्रो स्टेशन को बनाने में करीबन 3 से साढ़े तीन साल का वक्त लगता है। ऐसे में डीएमआरसी ने कम समय होने के बावजूद इस लाइन को बनाकर तैयार किया। इस कॉरीडोर को समय पर शुरू करने के पीछे कॉमनवेल्थ गैम्स के लिए बेहतर ट्रांसपोर्ट मुहैया कराना था।

  • चावड़ी बाजार स्टेशन कर दिया था कैंसल

दिल्ली मेट्रो का सबसे गहराई में तैयार किया गया पुरानी दिल्ली में बना चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन कंजस्टेड इलाके में होने के कारण कैंसल कर दिया गया था। मेट्रो के विदेशी सलाहकारों ने के मुताबिक, जगह की कमी के कारण मशीनों का प्रयोग कर पाना मुश्किल था। लेकिन डीएमआरसी ने इस चैलेंज को अपनाते हुए उपाय किए। मेट्रो के चीफ प्रवक्ता अनुज दयाल ने बताया कि स्टेशन को बनाने के लिए चावड़ी बाजार स्थित अमर सिनेमा को हायर किया और सिनेमा को तोड़कर स्टेशन का निर्माण कार्य शुरू किया। यह दिल्ली का एकमात्र ऐसा मेट्रो स्टेशन है, जो टनल बोरिंग मशीन से बनाकर तैयार किया गया है। बाकी मेट्रो स्टेशन कट एंड कवर मैथड से बनाए गए हैं।

  • पुरानी दिल्ली में मिला था कुआं
    दिल्ली मेट्रो को खुदाई में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इनमें से एक परेशानी चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन को बनाते वक्त भी सामने आई है। अधिकारी ने बताया कि इस स्टेशन से जुड़ी टनल बनाते वक्त एक कुआं डीएमआरसी को मिला था, जो काफी समय से बंद पड़ा था। खुदाई करते वक्त इस कुएं से इलाके में बने हुए एक शोरूम में पानी भर गया था। जिसका डीएमआरसी ने तुरंत बचाव करते हुए सामान और लोगों को नजदीकी होटल में शिफ्ट किया था।
  • टूटनी थी नोएडा की अट्टा मार्केट
    नोएडा सेक्टर- 18 मेट्रो स्टेशन बनाते वक्त अट्टा मार्केट की कुछ दुकानें बीच में आ रही थीं। डीएमआरसी के मुताबिक, स्टेशन तो बन जाता, लेकिन स्टेशन के लिए एंट्री और एग्जिट बनाना मुश्किल हो जाता। डीएमआरसी ने इसके लिए लोकल बॉडी से लेकर दुकानदारों तक बातचीत की, जिसके बाद दुकानों को तोड़ने की परमिशन नहीं मिली। अंतत में मेट्रो को एंट्री और एग्जिट गेट बनाने के लिए स्टेशन का साइज छोटा किया और फुटपाथ पर गेट का निर्माण किया गया।
  • जब श्रीधरन को आया था हार्ट अटैक

कॉमनवेल्थ गेम्स नजदीक आ रहे थे और डीएमआरसी के लिए बदरपुर लाइन को समय से पहले शुरू करना बड़ा चैलेंज था। ऐसे में मेट्रो मैन के नाम से मशहूर हुए ई श्रीधरन को हार्ट अटैक आने के दस दिन बाद ही ड्यूटी जॉइन की और अपना कार्यभार संभाला। जिसके बाद इस कॉरीडोर को समय पर शुरू किया गया।

यह भी हैं कुछ दिलचस्प बातें:

एस्कलेटर को कहते थे बिजली की सीढ़ी: दिल्ली में जब मेट्रो की शुरूआत हुई थी, तब एस्कलेटर जैसी सुविधाएं दिल्ली में काफी कम देखने को मिलती थी। जिस कारण दिल्ली में मेट्रो को आम लोगों से फ्रेंडली बनाने के लिए डीएमआरसी ने कई तरीके प्रयोग किए थे। गलियों- गलियों में नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करना शुरू किया, जिसमें एस्कलेटर जैसी सुविधा को लेकर लोगों को आसान शब्दों में समझाया। अधिकारी ने बताया कि एस्कलेटर को शुरूआत में बिजली की सीढ़ियां बोलकर समझाया जाता था।

एक कॉरीडोर का साल तक ट्रॉयल: डीएमआरसी के लिए डेडलाइन में काम पूरा करना भी एक बड़ा चैलेंज था। समय की कमी को देखते हुए डीएमआरसी ने शुरूआती कॉरीडोर को 15 से 20 दिन के ट्रायल के बाद आम लोगों के लिए कॉरीडोर शुरू किया था। जबकि बाकी देशों में एक कॉरीडोर को शुरू करने से पहले एक से डेढ़ साल तक ट्रायल किया जाता है।

एक स्टेशन, एक घंटे में 70 हजार यात्री: कॉमनवेल्थ गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी के दौरान जवाहर लाल नेहरु मेट्रो स्टेशन पर पैसेंजर की संख्या मात्र एक घंटे के भीतर 70 हजार पहुंच गई थी। ऐसा दिल्ली मेट्रो के इतिहास में पहली बार था, जब किसी स्टेशन पर एक घंटे में इतनी बड़ी संख्या में फुटफॉल देखने को मिला था।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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