Jo Gwal Baal Sang Liye I Janmasthmi Special

जो ग्वाल बाल संग लिए

जो ग्वाल बाल संग लिए आत है सबेरे सांझ
वही है जो घर-घर माखन चुराए है।
ऊंचो ऊंचो छींको वाको हाथ नांई आय रहयो
हिला-हिला सिर कछु जुगत भिड़ाए है।
कछु खाय अरु कछु धरा पे गिराय रहयो
का कहुं ओ सखी वाको लाज नांई आये है।
सना मुख सारा अरु हाथ सब सने हुए
लट आएं मुख पे, यों सर झटकाए है।
खुद खाए कछु, सब ग्वालों को खिलाए रहयो
सखी उसको तू काहे नांई समझाए है।
पकड़ो जो वाको तो वो हाथ कभी आए नांई
बात नाहीं माने, मंद-मंद मुस्काए है।
दे रई उलहाने गोपी, जशुदा लजाए रई
अरु चितै-चितै गोपी रई मुस्काए है।
खाए ना जो माखन वो, चैन कहां आए मोए
इकला वो खाय, सब जग कु अघाए है।
Image Source: www.dnaindia.com

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