Lashkar-e-Taiba के चार आतंकवादी कर रहे थे नरेंद्र मोदी को मारने की प्लानिंग, इशरत जहां उनमें से एक थी

इशरत जहां एनकाउंट केस को फर्जी बताने वाले अब क्या कहेंगे पता नहीं, लेकिन हम ये कह सकते हैं कि साल 15 जुलाई 2004 के दिन अपने तीन साथी आतंकवादियों के साथ मारी गई इशरत जहां एक आतंकवादी थी, जो नरेंद्र मोदी को मारने की प्लानिंग प्लोटिंग का हिस्सा थी. कांग्रेस ने उस वक्त इशरत जहां का एनकाउंटर फर्जी बताने में सारी ताकत लगा दी थी, जबकि हकीकत यह है कि इशरत जहां और उसके तीन साथी आतंकवादी लश्कर ए तोएबा संगठन से जुड़े हुए थे और ये मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मारना चाहते थे. इशरत जहां के साथ जो तीन आतंकवादी थे, उनके नाम जावेद गुलाम शेख, अमजद अली राणा और जीशान जोहर हैं.

इस मामले में आज सीबीआई की विशेष अदालत ने इशरत जहाँ एनकाउंटर मामले में क्राइम ब्रांच के तीन अधिकारियों की ओर से की गई कार्यवाही को जायज ठहराया है। अदालत ने यह भी कहा कि इशरत को आतंकवादी नहीं मानने का कोई कारण नजर नहीं आता है। कोर्ट ने कहा कि इशरत जहाँ, लश्कर ए तैयबा की आंतकी थी, इस खुफिया रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए तीनों अधिकारियों को निर्दोष बताते हुए बरी किया जाता है।

सीबीआई की विशेष अदालत ने आखिरी तीन आरोपित आईपीएस अधिकारी तरुण बारोट, जीएल सिंघल और सहायक उप निरीक्षक अनाजू चौधरी को भी आरोप से बरी कर दिया है। पिछले दिनों तीनों ही अधिकारियों ने आरोपों से मुक्त करने की अर्जी लगाई थी। अदालत ने कहा कि क्राइम ब्रांच के अधिकारी जी एल सिंघल, तरुण बारोट व अनाजू चौधरी ने आईबी से मिले इनपुट के आधार पर कार्यवाही की जैसा उन्हें करना चाहिए था।

आपको बता दें कि, इससे पहले तत्कालीन महानिदेशक पीपी पांडे, तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा व तत्कालीन पुलिस उपायुक्त एन के अमीन को भी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था।

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer