India is facing several problems but population is the key center for all of these.

भारत की सबसे बड़ी समस्या ‘जनसंख्या’ है

भले ही चीन दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश हो, लेकिन भारत की तुलना में चीन जनसंख्या पर नियंत्रण करने में कामयाब होता दिख रहा है। 14 जून 2018 को संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर मिनट में 29 बच्चे पैदा होते हैं, जबकि चीन में यह संख्या 11 बच्चे प्रति मिनट तक सीमित हो गई है। दुनिया की कुल जनसंख्या में भारत का हिस्सा 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जोकि चीन से कुछ ही कम है। भारत की कुल जनसंख्या 135 करोड़ है, जबकि चीन की जनसंख्या मात्र दो करोड़ ही अधिक है। यानी, कुछ ही साल बचे हैं, जब भारत की जनसंख्या दुनिया में सबसे अधिक होगी।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले दस देशों में भारत ही एक मात्र देश है, जहां जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार सबसे अधिक है। तीसरे नंबर पर सबसे अधिक आबादी वाले देश अमेरिका में 4 बच्चे हर मिनट में पैदा हो रहे हैं। जबकि सातवें नंबर पर नाइजीरिया देश में 9 बच्चे हर मिनट में पैदा होते हैं। टॉप दस देशों में नाइजीरिया जन्मदर के लिहाज से तीसरे नंबर पर आता है।

क्या आप जानते हैं यह आंकड़े

  1. भारत और चीन के बाद सबसे अधिक आबादी अमेरिका में है, जिसकी जनसंख्या तीसरे नंबर पर होने के बावजूद भारत से चार गुना कम है। अमेरिका की जनसंख्या 32 करोड़ है।
  2. भारत और चीन में दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या रहती है।
  3. सबसे अधिक आबादी वाले दस देशों में विकसित देश रूस और जापान भी शामिल है। रूस का 9वां और जापान का दसवां नंबर आता है।
  4. दुनिया में 233 देश हैं, जिसमें सबसे कम आबादी यूरोप के वेटिकन सिटी की है। इसकी जनसंख्या कुल 792 है।
  5. 32 देश ऐसे हैं, जिनकी आबादी एक लाख से कम है, जबकि 145 देशों में जनसंख्या एक करोड़ से कम है।
  6. 10 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले मात्र 14 देश हैं।

 

यह हैं दुनिया के दस सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों के आंकड़े

  1. चाइना – 139 करोड़
  2. भारत – 135 करोड़
  3. अमेरिका – 32 करोड़
  4. इंडोनेशिया – 26 करोड़
  5. पाकिस्तान – 21 करोड़
  6. ब्राजील – 20 करोड़
  7. नाइजीरिया – 18 करोड़
  8. बांग्लादेश – 16 करोड़
  9. रूस – 14 करोड़
  10. जापान – 12 करोड़

 

आखिर क्यूं है ‘बढ़ती जनसंख्या’ एक गंभीर समस्या

भारत में देश की जनसंख्या जिस कदर तेजी से बढ़ रही है, उसी तेजी से बेरोजगारी, गरीबी, बिमारियां, पानी की कमी आदि समस्याएं समानांतर बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में आई केंद्र सरकार की नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक देश की राजधानी दिल्ली और इकॉनामिक राजधानी महाराष्ट्र में पीने के पानी की कमी 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी, वहीं अन्य बड़े शहरों में भी पानी की किल्लत इतनी बढ़ जाएगी कि पीने के पानी के लिए जनता को समस्या का सामना करना पड़ेगा।

शहरों के बढ़ते दायरे की वजह से पेड़-पौधों की कटाई हो रही है जिससे प्रदूषण भी बढ़ रहा है। आलम यहां तक है कि दिल्ली में कंक्रीट की परत चढ़ने से पानी का लेवल घट रहा है, तो साथ- साथ पेड़-पौधों की कमी हो रही है और प्रदूषण बढ़ रहा है। देश की राजधानी में तो समस्या इस कदर बढ़ रही है कि सांस लेने के लिए लोग साफ हवा के लिए तरस रहे हैं। अब सोचिए कि यह समस्याएं वह हैं, जो सबसे पहले इंसान को जीने के लिए जरूरी हैं। अगर इन्हीं समस्याओं पर लगाम न लगाई गई तो आने वाली पीढ़ी को प्राकृतिक सुविधाएं मुहैया कराने में हम नाकामयाब हो जाएंगे।

कैसे हो जनसंख्या पर लगाम

वैसे तो जनसंख्या पर लगाम कसना देश की सरकारों के लिए चुनौती है, लेकिन नामुमकिन नहीं। 10 जुलाई 2018 को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 में चीन की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या की 65 प्रतिशत रह जाएगी। चीन को अपनी जनसंख्या न बढ़ने पर इतना भरोसा है कि साल 2016 में चीन ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए बनाई गई पॉलिसी वन चाइल्ड पॉलिसी को खत्म किया और कपल्स को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति भी दे दी। इसके अलावा चीन ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए जनता के साथ-साथ राज्यों की सरकारों व अधिकारियों को कई लुभावने ऑफर भी दिए।

कुछ ऐसे ही केंद्र सरकार को कुछ प्रयास करने चाहिए, जिससे बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाई जा सके। शहरों में दो बच्चे और ग्रामीण इलाकों में तीन बच्चे तक सीमित रहने वाले परिवार को सरकार द्वारा दी जाने वाले सभी सुविधाएं मिलें। इससे अधिक बच्चे पैदा करने वाले परिवारों को सरकार की सभी सुविधाओं से वंचित रखा जाएगा।

क्या कहते हैं राजनेता

हाल ही में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री ने जनसंख्या को बढ़ी समस्या बताया है। योगी आदित्यनाथ ने वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पर गंभीरता जताते हुए कहा था कि देश में जनसंख्या बढ़ना गंभीर मामला है। इसके किसी धर्म या जाति से न देखा जाए और राजनैतिक पार्टियां मिलकर काम करें। दूसरी ओर, गिरिराज सिंह ने हाल ही में ट्विटर पर लिखा था कि भारत की आबादी विस्फोट कर रही है, अब इसे नियंत्रित करने का उपाय करने का समय है, अन्यथा भविष्य की पीढ़ी को सामाजिक समरसता और बुनियादी सुविधाएं देना असंभव होगा।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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