jama-masjid-ka-meena-hai-meena-bazaar: Night Bulb

जामा मस्जिद का मीना है ‘मीना बाजार’

पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पूर्वी साइड में लाल किले की तरफ बना है यहां का फेमस मीना बाजार। मीना बाजार को लाल किले में शाही मीना बाजार से प्रेरित होकर 1970 में बनवाया गया था। लेकिन जिस मकसद से इस मीना बाजार को बनवाया गया था वह मकसद यहां शायद पूरा नहीं हो पाया है। चाहत तो थी कि इस मीना बाजार को देसी के साथ साथ इंटरनेशनल प्रर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा। फेमस तो यह काफी हुआ लेकिन बजार में जाने पर निराशा ही हाथ लगती है।

बाजार वैसे तो काफी चमक धमक वाला है लेकिन यहां पर ओरिजनल इक्का दुक्का चीजे मिल जाएं तो मिल जाए लेकिन ओरिजनल की नकल अवश्य मिल जाती है। मकसद था कि यहां पर एंटीक चीजें मिल सकती है मिल भी जाती थीं लेकिन अब तो एंटीक के नाम पर जो चीजें मिलती है वे देखते ही पता चल जाती हैं कि वे कितनी एंटीक हैं? दरीबा कलां के करीब जामा मस्जिद की पूर्वी साइड की सीढ़ियां उतरते ही बने इस मीना बाजार की हालत काफी खराब है। ऐसा नहीं है कि यहां पर कुछ मिलता नहीं है। लोकल बाजार के हिसाब से दिल्ली में दूसरे राज्यों से घूमने आने वाले सैलानियों के लिए यहां पर काफी कुछ मिल जाता है।

कई वजह से मशहूर है मीना बाजार

मीना बाजार में जाने वाली सीढ़ियों से बाजार शुरू हो जाता है। सीढ़ियों से लगने वाले पटरी बाजार में घड़ियां, नमाजी टोपियां, बुरखे, इत्र, पान सुपारी, इस्लामिक तीर्थ स्थलों की तस्वीरें, पोस्टर, लोकल पोस्टर, तरह तरह की एम्ब्रायडरी वाली टोपियां, कॉस्मेटिक्स और कपड़ों की दूकानें दिख जाती है। इन्ही सभी चीजों की दुकाने नीचे मीना बाजार में दोनों तरफ बहुतायत में हैं। सिल्क के कपड़े, महिलाओं के सूट, ज्वैलरी, लैदर का सामान, चांदी के अलावा अन्य मेटल के बर्तन, गिफ्ट आइटम्स, सजावटी सामान, हैंडी क्राफ्ट्स और हैंड प्रिंट्स कॉटन की काफी वैरायटी यहां पर मिल जाती है। यहां पर आइटम्स के रेट्स में भी पूरे बाजार में अलग अलग मिल जाता है। एक अनुमान के अनुसार दिल्ली हर साल यहां आने वाले लोगों की संख्या दिल्ली के अन्य बाजारों के मुकाबले काफी अधिक रहती है।

समय के साथ बदल गया है यह बाजार

सिर्फ लोकल ही नहीं यहां पर एयरकंडीश्नड शोरूम और दुकानों की भी अब कमी नहीं है। यहां हर तरह के लोग आना पसंद करते हैं। हर तरह का हर वैरायटी और हर वर्ग के हिसाब से सामान यहां एक ही बाजार में मिलना यहां की खूबी है। वैसे तो इस मीना बाजार को खासा एंटी चीजों के लिए जाना पहचाना जाता है। लेकिन यहां एंटीक नाम से शायद ही कुछ मिल जाए? सभी अधिकतर नकल होती है? अधिकतर लोगों का मानना है कि यहां पर चोरी का माल भी यहां पर चोरी छिपे बेचा जाता है।

यहां पर तकियो, गद्दों, कंबल लेने वालों के लिए तो जैसे मीना बाजार जन्नत सरीखा है। यहां पर लोकल से लेकिन कुछ अच्छी क्वालिटी के बैग, सूटकेस, बिस्तबंद, अटैचियां वगैरह भी खूब मिल जाते हैं। दिल्ली में घूमने आने वाले और जामा मस्जिद देखने वाले कभी भी मीना बाजार में घूमने का चार्म नहीं खोते हैं। यहां का चार्म दिल्ली के बाशिंदों ही नहीं बल्कि बाहर से आने वाले देसी विदेशी पार्यटकों के लिए बेहद चार्मफुल बना रहता है। यह कहना अलग बात है कि वे यहां से कैसा अनुभव अपने साथ लेकर जाते हैं? लेकिन यहां जामा मस्जिद या पुरानी दिल्ली आते हैं तो एक बार मीना बाजार जरूर आते हैं। मीना बाजार में खाने पीने की कोई कमी कहीं दिखाई नहीं देती। यहां पर कदम कदम पर खाने पीने के स्टॉल, ढाबे, होटल और रेहड़ियों सहज ही एक बार चखने को अपनी ओर खींच ही लेती है। इंडियन हों या मुगलाई, यहां नॉन वेज की आइटम हर दो कदम पर हैं। वेज पसंद करने वालों के लिए यहां पर कोई कमी नहीं है।

कब मीना होता है मीना बाजार

रमजान और ईद के दौरान तो यहां पर अलग ही रौनक होती है। बाजार वैसे से रोजाना सुबहह 11.30 बजे से शाम 6.00 सात बजे तक खुलता है लेकिन रमजान और ईद के दौरान देर रात तक यहां पर रौनक रहती है। ईद उल अजहा के लिए यहां पर कुर्बानी के बकरों की मंडी भी लगाई जाती है। यहां पर बिकने वाले बकरों की कीमत 300 रुपए से लाखों रुपए तक होती है। यहां पर इस दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा आदी से बकरों के कारोबारी बकरे बेचने के लिए आते हैं। इनमें तोतापरी, पहाड़ी, मेवाती वैगरह नस्ल के बकरों की अधिक डिमांड रहती है।

कैसे पहुंचे मीना बाजार

जामा मस्जिद के इस मीना बाजार तक पहुंचने के लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन सबसे अधिक नजदीक है। मेट्रो स्टेशन चावड़ी बाजार करीब पड़ता है। लोकल डीटीसी की बस से लाल किला या जमा मस्जिद बस स्टॉप बेहद नजदीक है। वरना टैक्सी और ऑटो रिक्शा से दिल्ली के किसी भी कोने से यहां आसानी से आया जा सकता है। आसपास हैं तो साइकिल रिक्शा या घूमते हुए यूं ही पैदल भी जा सकते हैं।

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