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हिटलर में थीं कई खूबियां, आइए जानें

हिटलर भले ही एक क्रूर किस्म का शासक था। 21वीं सदी में ऐसा शायद ही कोई तानाशाह पैदा हुआ हो, जिसने हिटलर की तरह इतने निरदई होकर लोगों की जान ली हो। द्वितीय विश्व युद्ध के आंकड़ों के मुताबिक, 6 मीलियन यहुदियों को हिटलर ने मरवा दिया था।

महेश दत्त शर्मा की किताब ‘एडोल्फ हिटलर’ में कहा गया है कि हिटलर ने प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार का सारा ठीकरा यहुदियों पर फोड़ा था। हिटलर का मानना था कि सेना को देश के अंदर रह रहे यहुदियों के ही कारण हथियार छोड़ने पड़े।

हिटलर की इस क्रूरता को आज पूरी दुनिया जानती है। घर-घर में उसकी क्रूरता के उदाहरण दिए जाते हैं। लेकिन जो लोग उसको ढंग से नहीं जानते, वे शायद उसकी कुछ ऐसी खूबियों को भी जानते होंगे जो आज के समय में भी युवाओं के लिए प्रेरणा देने का काम कर सकती हैं।

आइए जानते हैं, आखिर क्या थी हिटलर की खूबियां:

हिटलर अपनी जिंदगी में हमेशा परेशान होने के बावजूद कभी हार नहीं मानता था। वह अपनी जिंदगी में तीन बार गहरी निराशा में डूबा था। सबसे पहले 1918 में, जब जर्मनी की हार की खबर सुनने के बाद वह अस्पताल के बिस्तर पर ही लेटा रहा। दरअसल, उस वक्त जहरीली गैस से उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी।

दूसरी बार, जब उसकी पार्टी ने एक क्रांति की, जिस कारण उस पर देशद्रोह का मुकदमा चला और उसे जेल की हवा खानी पड़ी। और तीसरी बार जब उसकी भांजी ने आत्महत्या की. तीनों बार ही वह गहरा उदासी में पड़ा, लेकिन हिटलर खुद ही इन निराशाओं से बाहर निकाला। महेश दत्त शर्मा की किताब एडोल्फ हिटलर कहती है कि वह जब भी इन परेशानियों से बाहर निकला है, तो हमेशा पहले से दोगुनी ताकत के साथ राजनीति में उतरा था। हर बार उसमें अलग ही ऊर्जा दिखाई दी थी, मानों उसने अब पीछे न मुड़कर देखने की ठान ली हो।

हिटलर एक अच्छा वक्ता था

हिटलर की सबसे बड़ी खूबी ही अच्छा वक्ता थी। वह इस खूबी से जर्मनी पर राज करने में कामयाब हुआ। यह खूबी हर किसी में भले ही न हो, लेकिन जिसमें हो उसे समय रहते हुए पहचान लेना चाहिए। हिटलर की जिंदगी में भी इस खूबी को दूसरे शख्स ने ही पहचाना था। खुद हिटलर इस बात से अंजान था।

हिटलर एक अनुशासक व्यक्ति था

हिटलर एक अनुशासन में रहने वाला नेता था। यह खूबी उसके बोलने से लेकर चलने और पहनने में भी दिखाई देती थी। इतिहास के मुताबिक, हिटलर को यह खूबी विरासत में मिली थी। हिटलर के पिता सरकारी विभाग में कर्मचारी थे, जिस कारण उनका अनुशासन पर ज्यादा ध्यान रहता था। लेकिन इतिहास यह भी कहता है कि हिटलर ने अपने बचपन का काफी समय बर्बाद करने में बिताया था। इसलिए यह मानना ज्यादा ठीक होगा कि जब उसे जर्मन कामगार पार्टी में शामिल किया गया, वह तभी से अनुशासन का पालन करने लगा।

हिटलर में थी चपल रणनीतिकार था

हिटलर एक अच्छा रणनीतिकार भी था। जब हिटलर को जर्मन कामगार पार्टी में शामिल किया गया, उस वक़्त इस पार्टी का जर्मन के वजूद मात्र एक छोटे से शहर तक ही था। बावजूद इसके हिटलर ने पहले पार्टी को एक क्रांति का रूप दिया, जिसके बाद अकेले दम पर जर्मन की सबसे बड़ी पार्टी बनाकर खड़ा कर दिया। इस पार्टी का नाम बाद में नाजी रखा गया, जो हिटलर की ही देन था।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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