क्या हो जाता कुछ दिन और

क्या हो जाता कुछ दिन और
माँ लोरी मुझे सुनाती तो,
दादी मेरी कुछ दिन और
मुझको गोद खिलाती तो,
पापा मेरे कुछ दिन और
मेरा घोड़ा बन जाते तो,
मेरे दादा कुछ दिन और
मुझको लाड़ लड़ाते तो,
अभी तो चलना भी न आया
माँ क्यों तुमने हाथ छुड़ाया,
अभी तो मैं था नन्हा फूल
अभी से माँ क्यों भेज स्कूल,
बचपन मेरा छीन लिया क्यों
निंदिया मेरी छीनी क्यों,
सीख ही जाता सब मैं भी माँ
जो पापा को धीर बंधाती तो

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