लद्दाख में है, दुनिया का सबसे बर्फीला रेगिस्तान

लद्दाख धारा 370 हटने के बाद एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। यहां टूरिज्म के साथ-साथ अब लोग जीवन यापन के भी तरीके तलाशने में लगे हुए हैं. ऐसे में सबसे पहले वहां की भौगोलिक स्थिति को जानना बेहद जरुरी है, ताकि आप परिवार के साथ सुरक्षित घूम भी सकें और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहे.

ऐसा है लद्दाख

लद्दाख का मतलब ही है, लाख दरों का प्रदेश। लद्दाख देश के उस हिस्से पर बसा हुआ है, जहां आपको पहुंचकर ऐसा लगता है मानों आप दुनिया की चोटी पर खड़े हैं. दुनिया में सबसे ऊंचे पॉइंट भी लद्दाख में ही मौजूद हैं. इसके अलावा दुनिया का सबसे ठंडा और ऊंचाई पर रेगिस्तान भी लद्दाख में ही देखने को मिलता है. यहां पहाड़ों पर बर्फ की चादर चढ़ी रहती है और उसपर आने वाली सुबह की पहली किरण स्वर्ग जैसा महसूस कराती है. एक बार देखने के बाद, वैसा दृश्य आपकी निगाहों से शायद ही कभी निकल पाए.

धार्मिक स्थलों की भी भरमार है

लद्दाख के नजारों में सबसे ख़ास है तीन सबसे पुरानी फेमस मोनस्ट्रीज। इनका नाम है – थेकर्स, हिमिस और स्पितुक। अगर किसी मोनेस्ट्री में सुबह की प्राथना में भाग लेने का मौका मिले तो ऐसा अनुभव यहाँ के सिवाय और कहां मिलेगा। काली माता मंदिर के दर्शन और गुरु द्वारा पत्थर साहिब में माथा टेकना भी बेहद ख़ास है. लेह में देखने लायक बेशुमार ठिकाने हैं. लेह-लद्दाख को अगर पुराने वक़्त की रॉयल राजधानी कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

याक है, लद्दाख की पारम्परिक सवारी

याक ने पुराने समय से ही लद्दाख में अहम भूमिका निभाई है. यहां याक से ही सफर किया जाता रहा है, साथ ही आज भी माल ढोने के लिए याक का इस्तेमाल होता है. लद्दाखी मादा याक का दूध भी पीते हैं. इस दूध की चाय आपको बेहद पसंद आएगी। इसके अलावा लद्दाख का अंगूर भी ख़ास है, जोकि खुद ब खुद उग जाता है. लद्दाखी कहते हैं की लद्दाख में अंगूर की खेती करने की जरूरत नहीं होती. यहां अंगूर खुद उग जाता है.

फिल्मों में भी रहते हैं लद्दाख के जलवे

जब तक है जान, थ्री इडियट्स और भाग मिल्खा भाग जैसी कई फिल्मों में लद्दाख की रंगत को बारीकी से दिखाया गया है. इन तीनों फिल्मों में लद्दाख के कई अलग-अलग दृश्य हैं. अगर मनाली से लद्दाख जाने वाले रास्तों का भी अनुभव लेना चाहते हैं तो आप ट्रिप टू लद्दाख फिल्म देख सकते हैं. इस फिल्म में इरफ़ान खान लीड रोल में हैं.

इन वजहों से भी ख़ास है लद्दाख

लद्दाख में बेशकीमती जवाहरातों का भी बाजार है, जहां आपको तिब्बती मोती, मूंगा, लेपिस लेजुली, फ़िरोज़ा, पुखराज जैसे नगीने आसानी से उचित दाम में मिल जायेंगे। इसके अलावा, यहाँ घूमने के लिए शांति स्तूप, मैग्नेटिक हिल, हॉल ऑफ फेम म्यूजियम भी है. म्यूजियम में लद्दाख का बेशकीमती इतिहास संजोया गया है. ऐसे ही खर्दुंगला बाईपास दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना सड़क मार्ग है. जहां आप जाकर फोटो भी क्लिक कर सकते हैं.

लद्दाख पहुंचने के दो तरीके

लेह- लद्दाख जाने का दो तरीके हैं. इनमें एक मशहूर है तो दूसरा सहूलियत है. पहला मशहूर इसलिए है कि दिल्ली वाया हाईवे मनाली पहुंचकर, फिर वहां से बुलेट-बाइक या फिर स्पोर्ट्स कार के जरिए सड़क मार्ग से सोलो ट्रिप युवाओं में बेहद मशहूर है. घूमने का शौक रखने वाले इस ट्रिप को जरूर करते हैं. दूसरा साधन प्लेन है, जोकि सहूलियत से भरा है. आप दिल्ली से सीधा फ्लाइट पकड़कर लद्दाख जा सकते हैं. यहां से कुल एक घंटा 20 मिनट की फ्लाइट है.

कब जाना है लाभकारी 

लद्दाख 12 मासी ठंडा इलाका है, लेकिन मई से अक्टूबर के बीच आप यहां घूमने जा सकते हैं. दरअसल, इस वक़्त अधिकतम तापमान 25 और न्यूनतम 8 डिग्री तक गिर जाता है. जबकि सर्दियों में अधिकतम 5 और न्यूनतम माइनस 20 डिग्री तक गिर जाता है.

 

Image Source :

www.lehladdakhindia.com

www.swantour.com

www.devilonwheels.com

 

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer