देवभूमि के ये ट्रैक अप्रैल-मई में घूमने के लिए ही बने हैं

देवभूमि उत्तराखंड के टूरिज्म मंत्रालय के अनुसार, राज्य के जो ट्रैक टूरिस्ट के लिए सबसे खास हैं, वहां अप्रैल और मई में ही घूमना सबसे ज्यादा सही समय होता है। इसीलिए हमनें सोचा कि आपको उन ट्रैक के बारे में बताया जाए कि आखिर कौन- से ट्रैक पर आप घूमने जा सकते हैं। इसके अलावा इस खबर में हम यह भी बताएंगे कि इन ट्रैक पर जाने के लिए आप क्या- क्या ध्यान रखना होगा।

  • देवभूमि उत्तराखंड में ऐसे 16 ट्रैक सुनिश्चित किए गए हैं, जहां टूरिस्ट बिना किसी परेशानी के घूमने जा सकते हैं। यह ट्रैक ऋषिकेश, जोशीमठ, गुप्तकाशी, उत्तराकाशी, यमुनोत्री, नेटवर, बागेश्वर, मुन्सयारी और अलमोरा में मौजूद हैं।

ये हैं वो ट्रैक, जहां आप ट्रैकिंग करने जा सकते हैं।

  1. कुंवारी पास ट्रैक – 4265 मीटर
  2. गंगोत्री-गोमुख-तपोवन ट्रैक – 4463 मीटर
  3. हैमकुंड साहेब ट्रैक – 3858 मीटर
  4. कालिंदी खल ट्रैक – 5946 मीटर
  5. रूपकुंड ट्रैक – 4463 मीटर
  6. मिलम ग्लेशियर ट्रैक – 3915 मीटर
  7. काफनी ग्लेशियर ट्रैक – 4000 मीटर
  8. सुंदर डूंगा ट्रैक – 3700 मीटर
  9. खतलिंग ट्रैक – 3900 मीटर
  10. घुट्टू पनवाली कंठा ट्रैक – 3500 मीटर
  11. बागनी ग्लेशियर ट्रैक – 4484 मीटर
  12. छोपता टुंगनाथ ट्रैक – 12083 मीटर
  13. डोडीताल यमुनोत्री ट्रैक – 4150 मीटर
  14. नंदादेवी आउटर बेसकैंप ट्रैक – 4250 मीटर
  15. हर की दुन ट्रैक – 3566 मीटर
  16. कैदारनाथ ट्रैक – 3584 मीटर

अब जानिए, क्या- क्या ध्यान देना है जरूरी

  • ट्रैकिंग(Trekking) करने से पहले ट्रैकिंग से जुड़े सभी सामान खरीद लें, ताकि कोई परेशानी न हो। ऑनलाइन तो ट्रैकिंग के सभी सामान उपलब्ध होते हैं, लेकिन फिर भी भूल गए हैं, तो उत्तराखंड में ऋषिकेश, देहरादून, जोशीमथ, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी में ट्रैकिंग की दुकानें आपको आसानी से मिल जाएंगी।
  • ट्रैकिंग(Trekking) के वक्त हादसे हो जाते हैं। ऐसे में खुद को सुरक्षित करें और अपना ट्रैवल इंश्योरेंस जरूर करवाएं।
  • ट्रैकिंग(Trekking) के दौरान किसी भी वक्त इमरजेंसी होने पर SDRF (State Disaster Response Force) से तुरंत संपर्क करे।
  • ट्रैकिंग(Trekking) के लिए पहली बार जा रहें हैं, तो याद रखें उत्तराखंड सरकार (camping fees) कैंपिंग फीस, (Trekking fees) ट्रैकिंग फीस, गाइड जैसी कुछ फीस आपसे लेती हैं।
  • वैसे तो ट्रैकिंग(Trekking) के लिए नॉर्मल स्वस्थ व्यक्ति भी जा सकता है, लेकिन उत्तराखंड के कुछ ट्रैक ऐसे हैं, जहां के लिए आपको रोजाना की प्रेक्टिस की जरूरत होती है। ऐसे में नए हैं, तो छोटे ट्रैक को ही अपनी राह बनाएं।
  • अगर आपको कोई चोट लगती है, तो सरकारी गाइड आपको प्राथमिक उपचार यानी First Aid की सुविधा मुहैया कर सकते हैं।
  • सबसे खास बात, पहाड़ों पर मौसम को बदलने में देर नहीं लगती। ऐसे में ट्रैकिंग(Trekking) करने के साथ-साथ पहाड़ों पर यात्रा के लिए मई से मिड जुलाई और मिड सितंबर से मिड नवंबर तक ट्रैकिंग पर जा सकते हैं।
  • उत्तराखंड के लिए टूरिस्ट का ध्यान भगवान की तरह रखा जाता है। लेकिन आप सुरक्षित महसूस करना चाहते हैं, तो सरकार की GMVN और KMVN टूर ऑपरेटर के जरिए अपनी यात्रा कर सकते हैं।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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