ये है दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बना स्वीमिंग पूल

अगर अाप स्वीमिंग पूल में तैरना पसंद करते हैं या फिर स्वीमिंग पूल में समय बिताना आपको अच्छा लगता है, तो अन्य देशों में बने यह स्वीमिंग पूल आपको बेहद पसंद आएंगे। आपको इस स्वीमिंग पूल में वो एहसास मिलेगा, जो कहीं न कहीं आपके लिए सपना सच होने के बराबर होगा। खास बात यह है कि हम जिन स्वीमिंग पूल की बात कर रहे हैं, ये दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बने हुए हैं। यह स्वीमिंग पूल किसी न किसी होटल में बनाकर तैयार किए गए हैं।

आइए जानते हैं, कैसे हैं यह स्वीमिंग पूल- 

 

1 – 55वें फ्लोर पर बना है यह स्वीमिंग पूल

शंघाई में बने हुए द रिट्ज कार्लटन होटल के 55वें फ्लोर तक पहुंचने के लिए कई लोग तरस्ते हैं। यहां बना स्वीमिंग पूल शंघाई के इस होटल की शान है। यहां फिटनेस कॉम्पलेक्स और स्पा बना हुआ है। पूल सुबह साढ़े नो बजे से खुल जाता है और रात 12 बजे तक होटल के मेहमान इसका लुत्फ उठा सकते हैं।

 

2 – इस स्वीमिंग का बेस शीशे का बना है

जिन्हें ऊंचाई से डर लगता है, उनके लिए यह पूल काफी दिलचस्प होगा। इस पूल को हवा में बनाकर तैयार किया गया है। शंघाई के ‘होटल इन’ में ग्लास की आधारशिला पर बनाए गए इस स्वीमिंग पूल से आप नीचे सड़कों का नजारा पानी में रहते हुए भी ले सकते हैं। इस पूल की ऊंचाई जमीन से 328 फुट है। यह पूल सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है।

 

3 – हाथ में ड्रिंक और सनसेट का नजारा है इस पूल की पहचान

उगते और ढलते सूरज का नजारा इस स्वीमिंग पूल से इतना अच्छा होता है कि यहां 12 महीने होटल के गेस्ट की लाइन लगी रहती है। 24वें फ्लोर पर बनाए गए इस स्वीमिंग पूल से शहर भी पूरा-पूरा दिखाई देता है। स्वीमिंग पूल में नहाते हुए हाथ में ड्रिक लेकर बेठने की यह सबसे स्टाइलिश जगह है। यह होटल इंडिगो है, जोकि बैंगकॉक में बना हुआ है।

 

4 – यह है दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना स्वीमिंग पूल 

सिंगापुर का मैरीना बै सैंड होटल पूरे शहर में आउटडोर पूल के लिए मशहूर है। 57वें फ्लोर पर बने इस स्वीमिंग पूल की लंबाई आम स्वीमिंग पूल से तीन गुना ज्यादा है। यह जमीन से 650 फुट ऊपर है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा स्वीमिंग पूल कहा जाता है। यह पूल सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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