ये पत्थर नहीं, इन्हें कहते हैं “कृष्णा के मक्खन की गेंद”

भारत में विज्ञान से ज्यादा आम लोगों के बीच आस्था और मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ जगह प्रकृति को वो रूप देखने को मिलता है, जो अच्छे अच्छे वैज्ञानिकों को हैरान करता हैं और मान्यताओं को मजबूती देता है। शायद तभी तो इस देश को देवताओं की भूमि कहा जाता है। खैर, हम आपको आज एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां विज्ञान फेल है और आस्थाएं ज्यादा लोकप्रिय हैं।

इन्हें हिलाने की कोशिश रही है नाकामयाब

मद्रास यानी चेन्नई के महाबलीपुरम में कुछ ऐसे विशाल पत्थर हैं, जो एक ढलान पर सैकड़ों सालों से एक ही जगह जस के तस हैं। यह पत्थर ढलान पर होते हुए भी एक ही जगह टिके हुए हैं। कहा जाता है कि साल 1903 में मद्रास के गवर्नर रहे आर्थर लाउले ने एक बार सात हाथियों की मदद से पत्थर को हिलाने की नाकामयाब कोशिश करवाई थी। इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों ने प्रकृति की इस अदभुत रचना को ग्रैविटी का मजाक उड़ाना तक बता दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये सिर्फ प्रकृति की संरचना है बाकि कुछ नहीं। लगभग 20 फुट के ये पत्थर एक तिरछी सतह पर बिना लुढ़के ग्रेविटी का मजाक उड़ा रहे हैं.

स्थानीय लोगों में अलग है एक मान्यता

महाबलीपुरम में लोगों का मानना है कि यह पत्थर भगवन श्री कृष्णा के मक्खन की गेंद हैं. इसलिए इन पत्थरों को भगवन के पत्थर भी कहा जाता है. इन्हें देखकर लगता है कि ये अभी गिरने ही वाले हैं. लेकिन ऐसा कई सालों से नहीं हुआ है. लोग इन पत्थरों को नीचे बैठकर और लेटकर फोटो खिंचवाते हैं.

 

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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