सेंट स्टीफेन और हिंदू हैं DU के सबसे पुराने कॉलेज

एक समय ये दोनों कॉलेज चांदनी चौक में हुआ करते थे। सेंट स्टीफेन कॉलेज तो पंजाब यूनिवर्सिटी का हिस्सा हुआ करता था। उस समय डीयू था ही नहीं। पंजाब यूनिवसिर्टी डीयू से काफी पुरानी है। 1882 में केम्ब्रिज मिशन ने सेंट स्टीफेन कॉलेज की स्थापना की थी| उस समय यह कॉलेज चांदनी चौक के पीछे खुशहाल राय के कटरे में स्थित एक किराए की इमारत में चलाया जाता था। हिंदू कालेज की स्थापना 1899 में हुई। इसकी स्थापना श्रीकिशन गुड़वाला ने की। यह कॉलेज भी पहले चांदनी चौक की एक किराए की इमारत से शुरू हुआ।

सेंट स्टीफेन कॉलेज को बाद में कश्मीरी गेट स्थित अब ओल्ड स्टीफेन कॉलेज कही जाने वाली इमारत में ले जाया गया। पत्थरों से बनी अपने किस्म की इस इमारत में अब दिल्ली सरकार के अनेक दफ्तर काम कर रहे हैं। सेंट स्टीफेन और हिंदू कॉलेज अब नार्थ कैम्पस स्थित इमारतों में चल रहे हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अब नार्थ कैम्पस कहे जाने वाले क्षेत्र को डी यू को सौंपे जाने की एक लंबी कहानी है। दिल्ली को राजधानी बनाए जाने और आज की नई दिल्ली कहे जाने वाले इलाके में डी यू के लिए 200 एकड़ जमीन अलाट किए जाने का प्रस्ताव था। इस जमीन पर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग उसके अधीन चलने वाले दो कॉलेज एक ओरिएंटल रिर्सच इन्स्टीटयूट और कुछ अन्य स्कूल चलाए जाने का प्रस्ताव था। तत्कालीन सरकार 1915-16 में डी यू के लिए बिल्डिंग लैब, लेक्चर हाल और लाइब्रेरी बनवाने के वादे से मुकर गई।

भारत में उन दिनों अंग्रेजों का शासन था और देश में अंग्रेजी राज के खिलाफ आंदोलन तेजी से चल रहा था। स्कूल कॉलेज के छात्र छात्राएं और टीचर इस आंदोलन में अपने अपने तरीके से बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे थे। अंग्रेज सरकार अपने ही गढ़ में इन लोगों को एकत्रित होने का मौका नहीं देना चाहती थी। अंग्रेज सरकार का नई दिल्ली में यूनिवर्सिटी खोलने के लिए जगह नहीं देने का एक कारण यह भी बना। 26 मार्च 1926 को गर्वनर जनरल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में डी यू के लिए दी गई जमीन को वापस लेने का फैसला किया गया। डी यू के लिए जगह की तलाश के लिए अनके बार कमेटियां बनाई गईं। अंतत: कमेटी ने वाइसरीगल लाज जहां आज डी यू है के बारे में फैसला किया।

 

यूनिवर्सिटी का नाम प्रिंस आफ वेल्स रखवाए जाने की योजना बनी थी

 

इस यूनिवर्सिटी का नाम प्रिंस आफ वेल्स के नाम पर रखने और इसकी आधार शिला भी प्रिंस ऑफ वेल्स से रखवाए जाने की योजना बनी थी लेकिन फर्स्ट वर्ड वार से गुजरे ब्रिटेन की सरकार के पास इतने पैसे नहीं थे कि ऐसा किया जा सके इसलिए यह योजना खारिज कर दी गई। दिल्ली यूनिवर्सिटी को वर्तमान रूप में विकसित करने का आधार इसके पहले स्थापित की गई ढ़ाका और लखनऊ यूनिवर्सिटी के लिए बनाए गए कानून से मिला।

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