रफी का उत्तराधिकारी शब्बीर कुमार को माना जाता है

26 अक्टूबर 1954 को महाराष्ट्र के बड़ौदा में जन्में पार्श्व गायक शब्बीर कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। शब्बीर कुमार ने बड़ौदा में ही संगीत में अपने कैरियर की शुरुआत की। लेकिन देश की प्रमुख ऑर्केस्ट्रा के मेलोडी मेकर्स द्वारा चुने जाने के बाद वह सुर्खियों में आए। उन्होंने पहली बार पुणे और मुंबई में परफॉर्म किया।

इसके बाद उन्होंने पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की आयोजित एक श्रद्धांजलि शो ‘एक शाम रफी के नाम’ में प्रचारक के रूप में गाने गा कर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। शब्बीर का कहना है कि जब वह 1980 में रफी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे तब उनकी कलाई घड़ी रफी की खुली कब्र में गिर गई थी। उन्होंने इस घटना को ईश्वर की तरफ से एक दिव्य संदेश के रूप में माना कि वह रफ़ी के उत्तराधिकारी हैं।

गायक शब्बीर कुमार

संगीत निर्देशक उषा खन्ना ने पहली बार शब्बीर कुमार को 1981 में अपनी एक फिल्म ‘तजुर्बा’ में ब्रेक दिया। इसके बाद शब्बीर को एक और बड़ा ब्रेक मिला, जब डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने संगीत निर्देशक जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से शब्बीर को अपने साथ गाना गवाने के लिए सिफारिश की। उस समय लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, रफी की मृत्यु के बाद रफी के विकल्प की तलाश में थे। कुछ ही दिनों में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने शब्बीर कुमार को अपनी अगली फिल्म ‘कुली’ में गाने गाने का मौका दिया। यह फिल्म 1983 में रिलीज़ हुई थी। लेकिन शब्बीर की लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ पहली रिलीज़ फिल्म ‘मैं इन्तकाम लूंगा’ थी।

शब्बीर कुमार को पहली बार 1983 में फिल्म ‘प्रेम तपस्या’ में लता मंगेशकर के साथ ‘शाम है ये कुछ खोई खोई’ युगल गीत गाने का मौका मिला। संगीत निर्देशक अनु मलिक ने उन्हें राजीव कपूर को लेकर बनाई राजीव की पहली फिल्म ‘एक जान हैं हम’ में गाने का मौका दिया। इसके बाद शब्बीर ने सनी देओल और अमृता सिंह की पहली फिल्म ‘बेताब’ में प्रमुख पार्श्व गायक के रूप में गाने गाए। इस फिल्म के संगीत निर्देशक राहुल देव बर्मन थे। शब्बीर ने इस फिल्म में सनी देओल पर फिल्माए गए सभी पांच गाने गाए थे। इसके अलावा 1983 में फिल्म ‘कुली’ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने उनसे सभी सातों गाने, जिनमें छह अमिताभ बच्चन के लिए और एक ऋषि कपूर के लिए गवाए।

1980 के दशक में शब्बीर कुमार ने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, राहुल देव बर्मन, चित्रगुप्त, कल्याणजी-आनंदजी, राजेश रोशन, उषा खन्ना, बप्पी लाहिड़ी, अनु मलिक, रवींद्र जैन, राम-लक्ष्मण, नदीम श्रवण, आनंद मिलिंद, जतिन-ललित, उत्तम सिंह सहित सभी प्रमुख संगीत निर्देशकों के लिए गाया। उन्होंने दिलीप कुमार, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, जैकी श्रॉफ, ऋषि कपूर, जीतेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, राज बब्बर, गोविंदा, चंकी पांडे, संजय दत्त, कुमार गौरव, कमल हासन, रजनीकांत, अनिल कपूर, सनी देओल, राजीव कपूर और अक्षय कुमार जैसे प्रमुख अभिनेताओं के लिए पार्श्व गायन किया।

उन्होंने इस्माइल दरबार, शंकर-एहसान-लॉय और ए.आर. रहमान के लिए भी गाया है। 1990 में ‘आज का अर्जुन’, ‘घायल’ आदि फिल्मों में गाने के बाद शब्बीर ने स्टेज शो पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। उन्होंने 2000 में कई फिल्मों और निजी एल्बमों के लिए गाने गाए, कुछ हिट फिल्में थीं ‘घात’, ‘आवारा पागल दीवाना’ और ‘आन: मेन एट वर्क’। 2010 में शब्बीर ने फिल्म ‘हाउसफुल’ में अक्षय कुमार के लिए एक गाना गाया था, जिसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि यह शब्बीर कुमार की गायकी में वापसी है। यही नहीं शब्बीर ने न सिर्फ हिंदी बल्कि उर्दू, मराठी, बांग्ला, भोजपुरी, पंजाबी, राजस्थानी, गुजराती, हरियाणवी, उड़िया, मलयालम और अंग्रेजी आदि भाषाओं में भी गाया है।

उन्हें 34 गोल्ड डिस्क, 16 प्लेटिनम, एक कोहिनूर डिस्क सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। दुबई में ‘द बेस्ट प्लेबैक सिंगर’, बॉम्बे में ‘मोहम्मद रफ़ी अवार्ड’, देश के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह ने उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर के रूप में ‘कला रत्न अवार्ड’ से नवाजा था। संगीत की दुनिया में शब्बीर का छह हजार से अधिक गाने और 1500 से अधिक फिल्मों के गीत गाने का योगदान है। उन्होंने यूएई, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और कई अन्य देशों में कई लाइव संगीत कार्यक्रम किए हैं।

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