जब 13 दिनों तक साध्वी प्रज्ञा को बंद कमरे में पीटा गया

भारतीय जनता पार्टी ने आज साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से टिकट देकर राजनीतिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। पार्टी ने साध्वी को कांग्रेस के दिग्विजय सिंह के खिलाफ लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारा है। आज हम आपको साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की वो जानकारी देने जा रहे हैं, जिसमें हम आपको साध्वी प्रज्ञा के बतौर छात्रा से लेकर लोकसभा प्रत्याशी होने तक का सफर बताएंगे।

 

कॉलेज में (ABVP) अखिल भारतीय राष्ट्रीय संघ शामिल हुई थीं। 

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म मध्यप्रदेश के भिंड जिले के छोटे गांव में हुआ था। उनके पिता जी आर्युवेदिक डॉक्टर थे, साथ ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के कार्यकर्ता थे। साध्वी प्रज्ञा ने कॉलेज में जाकर आरएसएस की यूथ विंग अखिल भारतीय राष्ट्रीय संघ से जुड़ने का फैसला किया। साध्वी प्रज्ञा को एक अच्छा वक्ता के रूप में जाना जाता था। कॉलेज के ही दिनों में संतों के संपर्क में आने से प्रज्ञा, साध्वी प्रज्ञा बनीं।

 

बम ब्लास्ट कांड में आरोपी बनाकर 9 साल तक कैद किया गया

कांग्रेस की सरकार थी, महाराष्ट्र के जिला नासिक में एक जगह का नाम है मालेगांव। जहां एक मोटर साइकिल में बम ब्लास्ट हुआ और 7 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने मोटर साइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड होने का दावा किया। हालांकि, साध्वी प्रज्ञा की मानें तो वह गिरफ्तार होने वाले दिन से चार साल पहले मोटर साइकिल बेच चुकी थीं। साध्वी का कहना था कि मैं सन्यासी बन चुकी हूं। स्टूडेंट के तौर पर मोटर साइकिल चलाया करती थीं। लेकिन साध्वी प्रज्ञा की दलीलों की अनदेखी हुई और 9 साल की सजा काटनी पड़ी। हालांकि, 9 साल बाद एनआईए की रिपोर्ट में क्लीन चिट दी गई। उसी दौरान कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने साध्वी का नाम संघी आतंकवादी रखा था और उन्हीं दिनों कांग्रेस ने हिंदी के एक नए शब्द को जन्म दिया था। वो था – हिंदू आतंकवाद।

 

सुबह शाम तक सिर्फ पिटाई करते थे पुरुष पुलिस अधिकारी

साध्वी प्रज्ञा ने न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, केंद्र में यूपीए की सरकार थी, जिसने भगवा आतंकवाद को साबित करने की ठानी और मुझे उसका केंद्र बनाया। मुझे झूठे आरोपों के साथ गिरफ्तार किया गया। 13 दिनों तक गैर-कानूनी तौर पर एक काल-कौठरी में रखा गया। 13 दिनों तक उन्होंने प्रश्न नहीं, सिर्फ पिटाई की। यह इसलिए करना चाहते थे, ताकि उनसे भगवा आतंकवाद की थ्योरी के लिए हामी भरवा ली जाए। सभी ATS के पुरुष अधिकारी थे। बैल्ट से मारा गया। 24 दिन तक लगातार सुबह शाम पिटाई करते थे।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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