जीत का शहर – जयपुर

जयपुर यानी जीत का शहर। जी हां, इसका यही मतलब है। इसे तकरीबन 278 साल पहले कुशवाह राजपूत राजा सवाई जय सिंह ने 1727 में बसाया था। राजा सवाई जय सिंह ज्योतिष विद्या में विश्वास करने के साथ- साथ खुद भी तारों की गणना करने में महारथी थे। यह उस वक्त का पहला ऐसा शहर था, जिसे सुनियोजित तरीके से बनाया गया था।

मुग्लों ने अपने शासन के दौरान लाल पत्थर को अपने महल और किलों आदि में काफी उपयोग किया था, जिसके देखते हुए राजा सवाई जय सिंह ने जयपुर को गुलाबी रंग से पुतवाया और बनवाया। तभी से इसे गुलाबी शहर यानी पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है।

जयपुर खुद में देखने लायक तो है ही लेकिन इसके आसपास क्या-क्या खास है, चलिए आपको बताते हैं।

सिटी पैलेस : जयपुर के लैंडमार्क कहे जाने वाले सिटी पैलेस में कई पुरानी इमारतें, बरामदे, बड़े-बड़े बुलंद दरवाजे और मंदिर देखने लायक हैं।

जंतर- मंतर : सिटी पैलेसे से कुछ आगे जाने पर जंतर- मंतर दिखाई देता है। यह राजा सवाई जयसिंह द्वारा बनाए गए पांच वेधशालाओं में से एक है। साफ- सुथरी आकृति और पत्थरों से बनी इस वेधशाला की गणना अभी भी ठीक निकलती है। जंतर-मंतर में सवाई जय सिंह के तारों की गणना से जुड़े कई उपकरण आज भी रखे हुए हैं।

हवा महल : हवा महल को जयपुर की पहचान कहा जाता है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में यह विश्व प्रसिद्ध इमारत है। इस अनोखी विशाल इमारत को 1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था। हवा महल बुर्ज जैसी संरचना पर आधारित है। इसमें 365 खिड़कियां और झरोखे हैं।

हवा महल के दो द्वार हैं- चांद पोल और आनंद पोल। आनंद पोल के ऊपर बनी गणेश प्रतिमा के कारण आनंद पोल द्वार को गणेश पोल द्वार भी कहा जाता है। हवा महल किले के बाहर स्थित है। कहा जाता है कि हवा महल का निर्माण खासतौर पर महल की औरतों के लिए किया गया था। हवा महल के झरोखों में बैठ कर महल की औरतें बाहर की गली और बाजार का नजारा लिया करती थीं। लेकिन झरोखों की बनावट ऐसी थी कि बाहर से औरतों को कोई देख नहीं सकता था।

हवा महल का पूर्वी हिस्सा मुख्य भवन या मुख्या भाग कहा जाता है। यह भवन पांच मंजिला है। इसके अनेक कक्ष विभिन्न नामों से जाना जाते हैं।

जैसे शरद मंदिर, हवा मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर, रतन मंदिर आदि। बेहद अनूठी स्थापत्य शैली के इस भवन में ही शाही परिवार की महिलाएं जयपुर का नजारा लेती थीं। विशेष रूप से किसी भी पर्व के आयोजन का।

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