मिरिक- जहां प्रकृति की चादर में लिपटने का दिल करेगा

गर्मियों के दिनों में शिमला, नैनीताल जैसे ढेरों हिल स्टेशनों पर पर्यटक सबसे ज्यादा छुट्टिया मनाने आते हैं। ऐसे में बच्चों की छुट्टियों को देखते हुए चर्चा का यह विषय भी बन जाता है कि ‘कहां जाया जाए’ । दरअसल, भीड़ को देखते हुए हर कोई नई जगह ढूंढने की तलाश में रहता है। ऐसे में अगर आपको हम एक ऐसी जगह बताएं, जहां आपको पहाड़, प्रकृति की सुंदरता और शांति मिले तो कैसा लगेगा? जवाब होगा बिल्कुल अच्छा लगेगा।आज हम आपको पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के ऐसे स्थान के बारे में बताएंगे, जहां इस बार आप जरूर जाएं।

मिरिक – चाय बागानों के बीच खूबसूरत झील

इस जगह का नाम मिरिक है। न्यू जलपाईगुड़ी से करीब 54 किलोमीटर आगे मिरिक स्थान है। हिमालय की गोद में बसे इस छोटे से स्थान को अगर पहाड़ की गोद में प्रकृति का एक छोटा सा घोंसला कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मिरिक करीब 6000 फुट ऊंचाई पर बसा है। यहां का प्रमुख आकर्षण है शुभेंदु झील। करीब सवा किलोमीटर लंबी यह झील तीन फुट से 26 फुट तक गहरी है। इसके चारों ओर हिमालय की हरी भरी पर्वत श्रृंखलाएं हैं। यहां अकेले या परिवार सहित बोटिंग की जा सकती है। घोड़े पर बैठ कर आसपास की सैर की जा सकती है। बोटिंग का लुत्फ यहां कुछ अलग ही है। झील के बीचों बीच पुल है और बगल में खूबसूरत पार्क बने हुए हैं। इस झील में मछलियां भी खूब हैं। मछलियां पकड़ने वालों का ताता यहां लगा रहता है।

झील के अलावा यहां के ये भी हैं खूबसूरत नजारे

मिरिक के अन्य आर्कषणों में टामेती दारा भी है। इस जगह के आसपास के हिमाच्छादित पर्वत शिखर जादुई दृश्य सा नजर आते हैं। यहां अगर मौसम साफ हो या बादल न हों तो सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद खूबसूरत होता है। खास तौर से सूर्योदय का नजारा तो आपकी पलकें भी झपकने नहीं देगा। मानों बादलों के बीच से धीरे-धीरे एक लाल गोला निकलता है। आसपास की चोटियां पहले सिंदूरी-सुरमई सी नजर आती हैं। फिर जैसे ही सूर्य देव अपने रंग में आते हैं, पूरा परिदृश्य जैसे स्वर्णिम आभा से खिल उठता है। ऐसे ही चांदनी रात हो तो इन पहाड़ों का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है।

घने चाय के बागान दिल खुश कर देंगे

मिरिक का एक अन्य प्रमुख आकर्षण है। पहाड़ी ढलानों और चढ़ाई पर एक के पीछे चाय के पेड़ हैं। इनकी कटाई छंटाई इस तरह से की गई है कि कहीं से खड़े होकर देखिए पूरा का पूरा बाग एक समान ऊंचाई का नजर आता है। असमतल जमीन और सीढ़ीदार खेत में यह नजारा प्रकृति का करिश्मा है।

संतरे के बागान समेत कई चीजें हैं खास

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा संतरे भी मिरिक में ही मिलते हैं। संतरे के बाग में घूमते हुए पेड़ से टूटे ताजे संतरे का लुत्फ भी आप उठा सकते हैं। झील के पास ही सिंघा देवी मंदिर भी है। मिरिक में ठहरने के लिए दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल के टूरिस्ट लॉज और काटेज के अलावा कई होटल भी हैं। कुल मिलाकर कहें तो हरे-भरे पेड़ों, खतरनाक पहाड़ी चोटियों और दुर्गम मार्ग वाला यह स्थान अपने-आप में मिसाल ही है। खूबसूरत, शांत परिदृश्य, पक्षियों का कलरव, झील का गुनगुनाता पानी और फूल-पेड़-पौधों की बेहतरीन खूश्बू के बीच आप चंद दिनों तक ठहरना क्यूं नहीं चाहोगे।

कैसे पहुंचा जाए मिरिक

यहां नई दिल्ली, मुंबई, गुवाहटी, कलकत्ता आदि शहरों से सीधी ट्रेन मिलती है। ट्रेन न्यूजलपाईगड़ी शहर जाने के लिए बुक करें। हां, हवाई जहाज से भी आप जा सकते हैं। आपको बागडोगरा हवाई अड्डे जाने की टिकट बुक करनी होगी।आपको स्टेशन या अड्डे से ही टैक्सी लेनी होगी, जो आपको मात्र 500 रुपये में मिरिक पहुंचा देगी। अगर परिवार छोटा है, तो टैक्सियों को शेयर करने की भी सुविधा उपलब्ध होती है।

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