छतरपुर में है मां कात्यायिनी का मुख्य मंदिर

छतरपुर स्थित मां कात्यायिनी मन्दिर संत बाबा नागपालजी द्वारा स्थापित आधुनिक शक्ति पीठ के रूप श्री अर्धकात्यायिनी शक्ति पीठ मंदिर छतरपुर के नाम से देश-विदेश में प्रचलित है। 100 एकड़ में फैले में इस मंदिर की स्थापना 1974 में की गई।

मुख्य मंदिर कत्यायनी मां का है। कत्यायनी मां नौ देवियों में से मां का छठा रूप है। भगत जिस भावना से आते हैं, मां उसी भावना से उनकी मन्नत पूरी करती हैं। मंदिर के मेन गेट पर बड़ व पीपल का पेड़ है, जिसे मनोकामना वृक्ष कहते हैं। भक्त अपनी कामना पूरी करने के लिए चुन्नी और रुमाल पेड़ पर बांधते है। नवरात्रों में सुबह 11:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक और शाम को 7 बजे से रात 11 बजे तक यहां भंडारा लगता है। इसके अलावा हर पूर्णिमा को भंडारा लगाया जाता होता है। प्रत्येक रविवार को हलवा-पूरी का प्रसाद सुबह 10 से 4 बजे तक बांटा जाता है। यहां नवरात्र में एक बार में 20 हजार भक्त भंडारे में भोजन ग्रहण करते हैं।

मां का होता है रोज नया श्रृंगार

 

मां कात्यायनी का हर रोज नया श्रृंगार किया जाता है। मां रोज नए आभूषण और वस्त्र धारण करती है। नवरात्रों में मां की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सहस्त्र चंडी महायज्ञ और अतिरुषा महायज्ञ कराया जाता है। नवरात्रों से 41 दिन पहले मां का सहस्त्र कुम्भाभिषेक किया जाता है। ऐसा दुनिया के किसी और मंदिर में नहीं किया जाता है। छतरपुर वाले मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर में चाहे जितनी भीड़ हो जाए लेकिन दर्शन एकदम शांति से होंगे। नवरात्रों में कई किलोमीटरों लंबी लाइन लगने के बाद भी जब दर्शन का नंबर आता है तो भक्तों को किसी तरह की भगदड़ नहीं करनी पड़ती। इतनी भीड़ के बावजूद भी मंदिर में साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद रहती है।

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