80 रुपए की उधारी से 800 करोड़ तक का सफर

कहते हैं महिला घर की लक्ष्मी होती है. सही कहते हैं. जसवंती बैन भी अपने घर के लिए लक्ष्मी ही साबित हुईं, जब उन्होंने अपने परिवार की आय बढ़ाने के लिए कुछ करने की ठानी। जसवंती बैन वो महिला हैं, जिन्होंने मात्र 80 रुपए की उधारी के साथ भारत की सबसे बड़ी पापड़ कंपनी की नींव रखी. आप यूं भी कह सकते हैं कि उन्होंने लिज्जत पापड़ का पहला पापड़ बेला। आइए बताते हैं आपको पूरी जानकारी।

जसवंती बैन मुंबई में अपने परिवार के साथ रहती थीं. घर के हालत ठीक नहीं थे. 1959 में उन्होंने अपने परिवार के लिए काम करने की सोची और कुछ महिलाओं को इक्कठा किया. ये सभी महिलाएं भी ऐसे ही परिवार से थीं, जहां दो वक़्त की रोटी की गुजर बसर करना मुश्किल था. जसवंती बैन और बाकि महिलाएं गुजरती परिवार से आती थीं. ऐसे में सभी को पापड़, थेपला आदि बनाना बराबर आता था. जसवंती बैन ने पापड़ ही बनाने का फैसला किया. लेकिन काम शुरू करने के लिए पैसा नहीं था.

लेकिन जहां दृढ़ निश्चय हो, वहां सब संभव है.

जसवंती बैन ने काम शुरू करने के लिए उनके करीबी एक व्यापारी से उधार की मांग की. व्यापारी छगनलाल ने महिलाओं के उत्साह को देखते हुए तुरंत 80 रुपए की मदद की साथ ही पापड़ बेलने के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनों को भी सस्ते दाम पर दिलवाया। इन पैसों से जसवंती बैन और साथ काम करने वालीं लागुबेन अमृतलाल गोकानी, जयाबेन विठलानी, पार्वतीबेन रामदास ठोदानी , उजमबेन नरानदास कुण्डलिया, बानुबेन तन्ना ने मिलकर पापड़ बनाने का काम शुरू किया. कम पैसों के चलते और व्यवसाय में ज्यादा नुक्सान न उठाने के लिए इन्होने मात्र 4 पैकेट पापड़ ही बनाए और नजदीकी दुकानकार के यहां रखवा दिया.

अब कहते हैं न, लगन और ऊपर वाले की कृपा हो तो सब काम सफल होते हैं. उनका भी कुछ ऐसे ही हुआ. लिज्जत पापड़ के पहले चार पैकेट तुरंत बिक गए, साथ ही दुकानदार ने और पापड़ की डिमांड भी की. जसवंती बैन और बाकि सभी महिलाओं ने काम बढ़ाना शुरू किया. जसवंत बैन और उनकी साथी महिलाओं की लगन से काम इतना तेजी से बढ़ा कि मात्र 3 महीने में वो 6 से 25 महिलाएं हो गईं. लिज्जत पापड़ बनाने वाली इन महिलाओं ने एक महीने में करीब 6 हज़ार रुपए की कमाई की.

अब महाराष्ट्र के कोने कोने में जसवंती बैन का पापड़ मशहूर होता जा रहा था. ऐसे में उन्होंने अपनी कंपनी बनाई, जिसका नाम रखा – लिज्जत पापड़। इस कंपनी की शुरुआत 1962 में हुई. लिज्जत गुजराती शब्द है, जिसका अर्थ स्वादिष्ट होता है. 1962-63 में इस ग्रुप की वार्षिक आय 1 लाख 82 हजार पहुंच गया.

उन दिनों खादी ग्राम उद्योग ने भी लिज्जत पापड़ में अपनी दिलचस्पी दिखाई थी और लिज्जत पापड़ को फंडिंग भी की थी. आज जसवंती बैन का वो दृढ़ निश्चय कई हज़ार घरों का पेट भर रहा है और लाखो-करोड़ो घरों के मुंह का स्वाद भी बन चुका है. लिज्जत पापड़ आज 800 करोड़ रुपये की कंपनी है.

 

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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