स्वस्थ शरीर के लिए मुस्कुराइए नहीं, ठहाका लगाइये

आज हमारे रहन सहन का स्तर बढ़ा है, लेकिन ज़िंदगी से हंसी गायब हो चुकी है. तनाव से खुद को जकड़कर हमने अपने चारों ओर जरूरत और लक्ज़री सामानों से खुद को घेर तो लिया है. लेकिन ज़िंदगी के ख़ास हिस्से यानी हंसी को कहीं खो चुके हैं. हम अब हंसते नहीं है, बल्कि सिर्फ मुस्कुराते हैं.

एक रिसर्च कहती है कि पचास के दशक में इंसान दिन में लगभग 15 मिनट तक हंसता था, नब्बे के दशक तक आते आते यही हंसी सिमटकर मात्र एक तिहाई रह गई. एक आंकड़ा यह भी बताता है कि नब्बे के दशक वाली हंसी अब उसकी भी एक तिहाई हो गई है. स्टेनफोर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े रहे डॉक्टर विलियम बताते हैं कि जो लोग हंसने से परहेज करते हैं वो लोग गंभीर बिमारियों के घेरे में आ जाते हैं. इसलिए आज आपको बताते हैं कि हमें मुस्कुराना नहीं बल्कि हंसना चाहिए।

हंसी का ठहाका लगाओ और गंभीर बिमारियों से छुटकारा पाओ

  • हंसने का मतलब खुश रहने से होता है. अगर आप चिंताओं में डूबे रहेंगे तो आपका शरीर कमजोर होगा और मरने की ओर आप तेजी से बढ़ने लगेंगे। लेकिन अगर आप खुश रहेंगे तो आप हसेंगे भी. हंसेगे तो रोगों से भी दूर रहेंगे।

 

  • हंसने से एपिनेफ्रीन, डोपामाइन जैसे हार्मोन्स निकलते हैं, जो दर्दनाशक, एलर्जी उपचारक और रोगों से दूर रखने में मदद करते हैं. इतना ही नहीं, जोर जोर से हंसने से तनाव से दूर रहने के साथ साथ जुकाम, पेट की तकलीफें, कमजोरी, खून की कमी, काम में मन नहीं लगना जैसी आम समस्या से भी छुटकारा मिलता है.

 

  • अगर आप रोजाना जोर जोर से हंसते हैं, तो आपके केलोस्ट्रोल में भी कमी आती है. ऐसे ही हंसने भर से आप मधुमेह जैसी बीमारी से भी दूर रह सकते हैं. हंसने से इन्सुलिन का उत्पन्न होता है, जो मधुमेह में कमी लाता है.

 

  • हंसी मुफ्त की दवा है. इसलिए खुद भी हँसते रहने के साथ साथ दूसरों को भी हंसाते रहना चाहिए. ठहाके लगाने से दर्द, पाचन प्रक्रिया और फेफड़ों की भी कसरत हो जाती है. मनोरोगों के लिए ठहाका लगाना रामबाण के समान होता है.

इसलिए हसंते हंसाते रहिये, गम भुलाते रहिये और शरीर को रोगमुक्त भी रखिये।

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