सिर्फ ई-सिगरेट पर ही क्यूँ लगाया गया है बैन ?

सुर्खियों में शुरुआत से रहने वाली मोदी सरकार ने आज एक और फैसला किया है. अब देश में ई सिगरेट पर प्रतिबंद लग चुका है. सरकार का कहना है यह फैसला इसलिए लिया है कि भारत चीन के बाद दूसरा ऐसा सबसे बड़ा देश है, जहाँ सिगरेट से मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है. भारत में इस वक़्त 1 करोड़ से अधिक एडल्ट सिगरेट उपभोक्ता हैं.

लेकिन सिर्फ ई सिगरेट पर बैन लगाने भर से भारत के नागरिकों का स्वास्थ्य सुधर जायेगा ? ई-सिगरेट पर बैन की वजह क्या ? आइए जानते हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं कि आज का यूथ ई सिगरेट की लत में फंसता जा रहा है. साधारण सिगरेट की बजाए ई सिगरेट की डिमांड बड़ी है. इस लत की एक वजह इसके अलग अलग फ्लेवर भी हैं. एक आंकड़े के मुताबिक, भारत में 400 कंपनियां 150 अलग अलग तरह के फ्लेवर मार्किट में सप्लाई कर रही हैं.

  • एक तरफ ई सिगरेट पर आज प्रतिबंध लगाया गया है. वहीं दूसरी तरफ सवाल उस सिगरेट पर भी होना चाहिए, जो ना सिर्फ ज्यादा उपयोग की जाती है, बल्कि उस सिगरेट का सेवन ज्यादा हानिकारक है. हार्वर्ड मेडिसिन स्कूल के असिस्टेंट प्रोफेसर जॉन रॉस बताते हैं कि ई सिगरेट से ज्यादा हानिकारक वो आम सिगरेट होती हैं. जलती सिगरेट से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी जहरीली गैस निकलती हैं. इसके अलावा सिगरेट से टार भी निकलता है. जबकि ई सिगरेट की बात करें तो इसमें टार नहीं होता.

  • दा टबैको इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि सरकार को आम सिगरेट की बिक्री से होने वाली कमाई साल 2005-06 की तुलना में साल 2016-17 तक 4 गुना बढ़ी है. भारत सरकार की कमाई साल में 28,489 करोड़ हो गई थी, जोकि साल 2005-06 में 7,651 करोड़ थी. ऐसे में यह सवाल पूछना जायज है की क्या सरकार आम सिगरेट को सिर्फ इसलिए बैन नहीं करना चाहती, क्यूंकि सरकार के खजाने का काफी बड़ा हिस्सा सिगरेट की खपत से जुड़ा है ?

  • हालाँकि, इसका मतलब ये नहीं है की ई सिगरेट का कोई नुक्सान नहीं है. सबसे पहला नुक्सान तो यही है की ई सिगरेट में भी आम सिगरेट की तरह निकोटिन होता है, जो टाइप 2 डॉयबिटीज़, दिल की बीमारी और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी पैदा करता है. इसके अलावा ई सिगरेट आपके दिमाग की गति को कम करने का काम करता है. आप यह भी कह सकते हैं की ई सिगरेट का प्रयोग आपको स्थिर अवस्था में ला सकता है. जिसका नुकसान ये होता है कि आजकल यूथ ई सिगरेट की लत लगा बैठा है. एक वजह इसके अलग अलग टेस्ट के फ्लेवर भी हैं.

  • अगर बात सिगरेट की हो रही है, तो हमें यह भी जानना जरुरी है कि अगर सरकार आम सिगरेट पर भी प्रतिबंध लगाती है, तो इसका फायदा होने के साथ क्या क्या नुक्सान हो सकता है ? दरअसल, तंबाकू की खेती से देश का काफी बड़ा तबका जुड़ा हुआ है. तंबाकू के उत्पादन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 45 लाख लोग जुड़े हुए हैं. इस व्यापार में 70 प्रतिशत किसान हैं. तंबाकू के व्यापार से किसानों को आर्थिक और सामाजिक सुधार में मदद मिली है. साल 2001-02 की तुलना में इसका उत्पादन साल 2013-14 में 88 प्रतिशत बढ़ा था, इसके साथ साथ कीमत में इजाफा भी 250 प्रतिशत तक पहुंच गया था. ऐसे में जहां यह व्यापार 2001-02 में 584 करोड़ था, वो साल 2013-14 में 3873.14 करोड़ हो गया था.

ऐसे में सरकार का बैन पर स्पष्टीकरण समझ से परे है. हम आंकड़ों पर सिर्फ चर्चा कर सकते हैं, फैसले सरकार के हाथ में हैं.

Data Source : tiionline.org

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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