अपने समय के मशहूर कॉमेडियन थे देवेन वर्मा

अपने समय के मशहूर अभिनेता और कॉमेडियन रहे देवेन वर्मा ने कई यादगार फ़िल्में दी हैं. लेकिन हर फिल्म में उनका किरदार अलग किस्म का हुआ करता था. उनके बोलने का प्यार भरा सॉफ्ट अंदाज़ दर्शकों के दिल पर छाया करता था. चार बहनों में अकेले भाई देवेन के पिता चांदी के कारोबारी थे. लेकिन देवेन का मन चांदी के काम में नहीं लगा और उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का काम करना शुरू कर दिया.

देवेन ने यूथ फेस्टिवल और ड्रामों में भी हिस्सा लेना शुरू कर दिया था. एक दिन देवेन परफॉर्म कर रहे थे और दर्शकों की भीड़ में बी आर चोपड़ा बैठे थे. बस फिर क्या था, वहीं बी आर चोपड़ा ने देवेन को फिल्म का ऑफर दिया और मुंबई बुला लिया. पहले देवेन को 600 रुपया महीना पर रख लिया गया और 1961 में उन्हें ‘धर्मपुत्र’ फिल्म में रोल दिया गया. हालांकि यह फिल्म बॉक्सऑफिस पर पिट गई. उस वक़्त देवेन मोरिशियस में थे. उन्हें यह जानकारी शशि कपूर के एक पत्र से मिली थी.

देवेन के मुंबई लौटने के बाद उन्हें मैयाप्पा स्टूडियो ने 1500 रुपए महीना पगार पर हायर किया गया, जिसके बाद उन्हें 1963 में ‘गुमराह’ फिल्म मिली. इस फिल्म में देवेन अभिनेता अशोक के नौकर के तौर पर रहे. उनका किरदार कॉमेडियन था. यहां उनके किरदार की सराहना की गई. इस फिल्म के बाद मरियप्पा ने उन्हें मद्रास और मुंबई में से एक जगह चुनने का मौका दिया और देवेन ने मुंबई को अपना हमसफ़र बना लिया.

उन्हें 1964 में फिल्म मिली, जिसका नाम था – ‘कव्वाली की रात.’ यह फिल्म उन्होंने मशहूर अभिनेत्री मुमताज के साथ की थी. यह मुमताज की भी पहली ही फिल्म थी. इसके बाद देवेन ने 1966 में 2 फ़िल्में की, जिसमें एक ‘देवर’ और दूसरी ‘अनुपमा’। देवेन ने फिल्म करने में जल्दबाजी नहीं की. उन्होंने साल में सिर्फ दो फ़िल्में करने का फैसला किया। उन्हें ‘चोरी मेरा काम’ फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके अलावा उन्हें ‘अंगूर’ और ‘चोर के घर चोर फिल्म’ के लिए भी 2 फिल्मफेयर अवार्ड मिले थे.

देवेन ने फिल्म इंडस्ट्री को 47 साल दिए थे. उनकी शादी अशोक कुमार की बेटी रूपा गांगुली से हुई थी. हालांकि अशोक कुमार ने देवेन के प्रस्ताव पर पहले सोचकर बताने की बात कही थी और 2 साल सोचने के बाद दोनों की शादी करा दी.

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