दिल्ली में भी है एक भूल भुलैया

महरौली में पुरात्तविक महत्व के अनेक मन्यूमेंटस हैं। इनमें महरौली कॉलोनी के बीचों-बीच बनी अन्य महत्वपूर्ण इमारतों की तरह है आदम खान का मकबरा। इसे भूल भुलैया के नाम से अधिक जाना जाता है। कुतुब मीनार के ठीक पीछे कॉलोनी में बने इस मकबरे के चारों तरफ बसावट है। सामने ही डीटीसी का महरौली बस टर्मीनल है और यहां का मुख्य बाजार भी है।

यहां के निवासियों के लिए बेशक यह उनके अन्य ऐतिहासिक इमारतों की तरह आम इमारत भर है लेकिन महरौली आने वाले देसी विदेशी पर्यटकों के लिए अभी भी आकर्षण का केंद्र बना रहता है। लोग इस जगह को एक मीटिंग पॉएंट की तरह भी इस्तेमाल करते हैं। इस इमारत में जाते ही दिखता है कि यहां पर पर्यटक कम और लोकल लोगों की भीड़ अधिक है।

भूल भुलैया उर्फ आदमखान का मकबरा एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बना हुआ है। पर्यटक इस भूल भुलैया को देखने तो यहां आसपास रहने वाले लोग यहां पर अपना समय बिताने और सर्दियों में धूप सेंकने के लिए आते हैं। आसपास की महिलाएं दोपहर में फुरसत के श्रणों में धूप सेंकने के साथ साथ यहां बतियाती दिख जाती हैं। काफी लोग यहां पर फुरसत के श्रण बिताते हैं तो काफी स्टूडेंट यहां पर पढ़ाई करते दिख जाते हैं। इलाके के बच्चे यहां पर साइकिल चलाते हैं खेलते कूदते हैं। स्कूल से लौटते बच्चे अक्सर यहां मकबरे की बाउंडरी की दीवार पर बैठे रहते हैं। शाम होने तक यहां मकबरे पर चहल पहल रहती है अंधेरा होते ही सब अपने घर की तरफ धीरे धीरे चले जाते हैं। यहां से दूर तक का नजारा काफी साफ दिखता हैं। दूर खड़ी कुतुब मीनार को भी यहां से देखने का अपना अलग मजा है। आजकल सर्दियों में तो यहां पर लोकल लोगों और आसपास की महिलाओं के छोटे छोटे झुंड बैठे नजर आने लगेंगे।

यहां के चंद लोगों का मानना है कि जैसा कि वे सुनते आए हैं कि यहां पर भूतों का निवास है। किस्से कहानियां तो यहां तक है कि सदियों पहले यहां पर एक बारात आकर ठहरी थी लेकिन बारात की बारात रात में गायब हो गई। तभी से रात बिताने या अंधेरा होने के बाद यहां पर जाने की सोच कर भी डर लगता है। लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं मिला।

 

यह है भूल भुलैया का इतिहास

आदम खान, अकबर के साम्राज्य में जनरल और अकबर का सौतेला भाई भी था। उसने अकबर के वजीर आगा खान की हत्या कर दी थी क्योंकि वजीर ने आदम खान के भ्रष्टाचार और हिसाब में हेरफेर का भंडाफोड़ कर दिया था। अकबर वजीर को अपने पिता तुल्य मानता था। आदम द्वारा वजीर की हत्या से क्षुब्द होकर अकबर ने आदम खान को मरवा दिया। चूंकि आदम अकबर की दाई मां महाम अंगा का बेटा था इसलिए उसने उसका मकबरा यहां पर बनवा दिया। यहां पर आदम खान और उसकी मां महाम अंगा दोनों दफ्न हैं। 16वीं सदी में बना यह आदम खान का मकबरा उर्फ भूल भुलैया अभी भी काफी अच्छी हालत में है। एक गुंबद वाला यह मकबरा लाल कोट और राय पिथौरा की तरह ही मजबूत स्थिति में है। डिजाइन भी काफी मिलता जुलता है।

इस भूल भुलैया की यह ऐतिहासिक इमारत मेनरोड, बस टर्मीनल और मुख्य बजार के बेहद करीब है इसलिए यहां से ट्रैफिक भी बेतहाशा गुजरता है। इससे इमारत को धीरे धीरे नुकसान होता जा रहा है। मकबरे के चारों तरफ फैला पल्यूशन धीरे धीरे इसको कमजोर कर रहा है। आसपास बनी और बनती जा रहीं बहुमंजिला इमारतें इस मकबरे को ढकती चली जा रही हैं। कहते हैं 1830 में एक ब्रिटिश ऑफिसर ने इस मकबरे से दोनों कब्रों को हटा दिया और यहां पर अपने लिए डायनिंग हॉल बनवा लिया था। लेकिन उसकी मौत के बाद लॉर्ड कर्जन ने आदम खान और महाम अंगा दोनों की कब्र वापस यहां पर करवाई। इस मकबरे का नाम भूल भुलैया क्यों और कैसे पड़ा इसका भी कुछ पता नहीं चला। भूल भुलैया जैसा यहां पर ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।

 

 

Image Source : www.fpinfo.in, Wikipedia 

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