जॉन चाचा उर्फ डेविड को कौन नहीं जानता

‘नन्हें-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है’ से बच्चों में फेमस हुए जॉन चाचा को अखिर कौन नहीं जानता। डेविड का पूरा नाम डेविड अब्राहम चेउलकर था। ऋषिकेश मुखर्जी की अधिकतर फिल्मों में डेविड चतुर अंकल, पड़ोसी या पिता की भूमिकाओं में नजर आए थे।

हिंदुस्तान में रह रहे यहूदियों में से एक डेविड ने 1930 में मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद करीब छह साल तक छोटी-मोटी नौकरियां कीं। काम नहीं चल रहा था सो डेविड थिएटर में भी अभिनय करने लगे। उसी दौरान फिल्मों में काम करने वाले अपने एक दोस्त नायमपल्ली जो कि एक कैरेक्टर एक्टर थे, की सिफारिश पर डेविड को 15 जनवरी, 1937 को मोहन भवनानी की एक फिल्म ‘जंबू“ में एक रोल मिला। फिल्मों में काम करने के अलावा डेविड थिएटर में तो काम कर ही रहे थे साथ ही उन्होने कई छोटे मोटे काम मसलन सह निर्देशक, प्रोडक्शन मैनेजर और यहां तक कि क्लैपर ब्वाय तक का काम किया।

1940 में वह दूसरे स्टूडियो में शामिल हो गए लेकिन यहां भी वे ज्यादा कामयाब नहीं हो सके। इसके बाद डेविड ने अपनी वकालत की डिग्री पूरी की और फिल्म इंडस्ट्री में वापस आकर अभिनय करने लगे। 1941 से उनका एक्टिव करियर ठीक तरह से शुरू हुआ जो 110 से अधिक फिल्मों में चला।

1954 मे रिलीज हुई फिल्म `बूट पॉलिश में अभिनय के लिए सह अभिनेता का पुरस्कार भी मिला था। इस फिल्म के एक गाने जो उन पर और बच्चों के लिए बच्चों पर फिल्माया गया था गाने नन्हें-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है आज भी लोगों की जुबान पर किसी न किसी मौके पर आ ही जाता है। फिल्म का एक गाना ‘जान चाचा तुम कितने अच्छे, तुम्हें प्यार करते सब बच्चे’ भी है जो आज तक हिट है। डेविड की कुछ अन्य यादगार फिल्मों में ‘गोलमाल’, ‘बातों बातों में’, ‘चुपके चुपके’ आदि शामिल रही हैं। 1969 में डेविड को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। जीवन भर अविवाहित रहने वाले डेविड की मृत्यु टोरंटो, कनाडा में 28 दिसंबर, 1981 में हुई थी।

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