वो बॉलीवुड कलाकार जो एक अच्छा राजनेता भी रहा

इन दिनों महाराष्ट्र में राजनेता और कलाकार आमने सामने दिखाई देने लगे हैं. बॉलीवुड खेमों में बंट रहा है, तो राजनेता भी उसी कलाकार को पसंद कर रहे हैं, जो उनकी तारीफ में कसीदे पड़ता रहे. लेकिन आज हम आपको एक ऐसा बॉलीवुड स्टार के राजनीतिक किस्सों के बारे में बताएंगे, जिनको सुनकर आप आज की राजनीति को तुछ ना समझें तो कहना.

राजनीति का इतिहास रहा है कि बॉलीवुड कलाकार पार्टियों को फायदा पहुंचाते हैं, जीतते भी हैं, भीड़ इकट्ठी करने का काम भी करते हैं और अगले पांच साल का कार्यकाल जनता से दूर रहकर बिता देते हैं। ऐसे कलाकारों में शत्रुघन सिन्हा, गोविंदा, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, जावेद अख्तर आदि कई नेता हैं, जो बॉलीवुड से राजनीति में भी आए, लेकिन जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे.

इतिहास तो कई कलाकारों का है, लेकिन आज हम सिर्फ एक ऐसे कलाकार के बारे में बताएंगे, जो बॉलीवुड के साथ-साथ राजनीति में भी अपना नाम कमा गए। उनका नाम है सुनील दत्त। सुनील दत्त अपने समय के दमदार बॉलीवुड स्टार में से एक थे. उनका यह गाना तो आपने सुना ही होगा.

सुनील दत्त कांग्रेस से राजनीति में आए और अपने दुश्मनों को अपनी जुबान से नहीं काम से चुप कराते रहे. सुनील दत्त ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत 1984 में कांग्रेस पार्टी से की थी। जब सुनील दत्त सांसद थे, उन दिनों बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था। ऐसे में उन्होंने धर्म पंथ का भेदभाव करने की बजाय सभी की मदद की थी.

सुनील दत्त वो नेता थे, जो पार्टी के अनुसार नहीं बल्कि सही और गलत के अनुसार फैसले किया करते थे. उन्होंने अपने एक कार्यक्रम से सभी को चौंका दिया था। सुनील दत्त ने अपनी पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और पार्टी पर स्थिति को सही ढंग से संभाल न पाने का आरोप लगाया और सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।

सुनील दत्त साहब ने धर्मनिरपेक्षता के लिए बतौर सांसद कई काम किए। सुनील दत्त ने सामाजिक सुधार और सांप्रदायिक सदभाव बनाने के लिए पद यात्रा तक निकाली थी, जोकि लंबे समय तक चर्चा में रही। कुछ मीडिया खबरों की मानें तो सुनील दत्त की उभरती छवि से उन्हीं की पार्टी के लोग परेशान थे। सुनील दत्त काम करने के साथ- साथ आम जनता के दिलों में जगह बना रहे थे। ऐसे में कई नेताओं ने उनके बेटे संजय दत्त को हथियार बनाकर सुनील दत्त की छवि खराब करने का प्रयास तक किया था।

सुनील दत्त का एक स्वभाव यह भी था कि वह अपनी विरोधी पार्टी के नेताओं की खुलेआम तारीफ करते हुए भी नहीं हिचकते। और हिचकते भी क्यूं, स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे ने सुनील दत्त की उन दिनों में मदद की थी जब खुद कांग्रेस पार्टी सुनील दत्त से दूरिया बनाए हुए थी।

सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त ने कांग्रेस पर एक टीवी चैनल पर आरोप लगाया था कि उनके पिता की मौत कांग्रेस की वजह से हुई। पिता संजय निरुपम के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ थे, जिन्होंने शिवसेना में रहते हुए सुनील दत्त को गाली देने के साथ- साथ अपशब्द भी कहे थे। संजय दत्त ने यहां तक कहा था कि जब मुझे जेल में रखा गया, तब कांग्रेस की सरकार थी और जब मुझे छोड़ा गया तक कांग्रेस पॉवर में नहीं थी। अगर कांग्रेस मेरे पिता से लगाव रखती, तो उन्हें मेरी मदद करनी चाहिए थी।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

Leave a reply:

Your email address will not be published.

Site Footer