नासिर हुसैन ने दिया था आमिर को ब्रेक

3 फरवरी, 1931 को भोपाल में जन्मे नासिर हुसैन को म्यूजिकल हिट फिल्में बनाने के लिए याद किया जाता है। नासिर ने 1948 में फिल्मिस्तान स्टूडियो ज्वॉएन किया और एआर कारदार के लिए ‘अनारकली’, ‘मुनीमजी’ और ‘पेइंग गेस्ट’ फिल्मों की कहानी लिखी। फिल्मिस्तान का गठन उस समय की मशहूर कंपनी ‘बांबे टॉकीज’ से टूटकर किया गया था। फिल्मिस्तान के कर्ता-धर्ता शशिधर मुखर्जी ने 1959 में नासिर को ‘दिल दे के देखो’ फिल्म का निर्देशन करने का मौका दिया।

 

इसमें आशा पारेख को हीरोइन के रूप में लिया गया और आशा और नासिर का साथ 1971 तक फिल्म ‘कारवां’ तक लगातार चलता रहा। वैसे नासिर ने अपनी फिल्म कंपनी ‘दिल दे के देखो’ के बाद ही ‘नासिर हुसैन फिल्म्स’ बना ली थी और इसी के बैनर तले कई हिट फिल्में बनाईं। नासिर ने ‘दिल दे के देखो’ में पहली पसंद देवानंद को रखा था पर किसी वजह से उनके हट जाने के कारण यह रोल शम्मी कपूर को दिया गया। अब नासिर, शम्मी, आशा और आरडी बर्मन की जो चौकड़ी जमी उसने लगातार कई वर्षों तक बॉलीवुड पर राज किया और एक के बाद एक सुपरहिट म्यूजिकल फिल्में दीं। इनमें प्रमुख हैं:-‘जब प्यार किसी से होता है’ 1961, ‘फिर वही दिल लाया हूं’ 1963, ‘तीसरी मंजिल’ 1966, ‘बहारों के सपने’ 1967, ‘प्यार का मौसम’ 1969, ‘कारवां’ 1971, ‘यादों की बारात’ 1973 और ‘हम किसी से कम नहीं’ 1977।

 

इनकी फिल्मों को सुपर हिट करने में दादा आरडी बर्मन के शानदार संगीत का भी उतना ही हाथ जितना कि नासिर हुसैन की डायरेक्शन का। बर्मन दा ने इनकी फिल्मों के लिए मुहम्मद रफी की आवाज का इस जादुई अंदाज में इस्तेमाल किया है कि वे गाने आज भी हिट हैं और आशा भोसले की आवाज का भी जादू आज तक छाया हुआ है। नासिर की फिल्मों के एक और परमानेंट चेहरे थे कॉमेडियन राजेंद्रनाथ। आज के सुपर हिट एक्टर आमिर खान को भी बॉलीवुड में नासिर हुसैन ही लाए थे। नासिर ने आमिर की बॉलीवुड में एंट्री 1988 की अपनी फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ से करवाई थी। आयशा हुसैन से विवाहित नासिर के दो बच्चे मंसूर और नुजहत हैं। 13 मार्च, 2002 को उनका निधन हुआ।

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