दिल्ली के माल रोड इलाके में उतरी थी उड़नतश्तरी !

दिन था 17 मार्च 1978। दिल्ली आम दिनों की तरह अपने काम में व्यस्त थी। बस और दो पहिया वाहनों से ज्यादातर लोग आवाजाही कर रहे थे। दुकानें रोजाना की तरह खुली हुई थीं। उसी वक़्त पांच मिनट में ऐसा क्या हुआ कि तुरंत 32 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हो गए। पुराने अख़बारों की कटिंग में 700 से 800 लोगों के घायल होने की जानकारी मिलती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुडी माल रोड पर पेड़ उखड़कर जहां-तहां गिरे। पंक्ति में चल रहा ट्रैफिक अस्त व्यस्त हो गया। ऑल इंडिया रेडियो के दो ट्रांसमिशन टावर भी टूट गए थे। प्रसारण भी इस तबाही के कारण बंद हो गया था।

यह था पूरा मामला

ये उन दिनों की बात है, जब सूचना का एकमात्र माध्यम रेडियो था। सूचना के अभाव में आम लोग भयभीत थे। दिल्ली में यह अफवाह थी कि वहां कोई उड़न तश्तरी उतरी थी, जिसने चंद मिनटों में पूरा इलाका तबाह कर दिया। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क पूरी तरह उजाड़ हो चुकी थी। सड़क किनारे लगे पेड़ उखड़ गए थे। टू-व्हीलर और तिपहिया सड़क के आसपास ऐसे पड़े हुए थे, जैसे उन्हें बुरी तरह हवा में उछालकर फेंका गया हो। जिस वक्त वहां तबाही आई, उस वक्त सड़क पर गुजरने वाली यात्रियों से भरी बसें उलट गई थी, या उनकी दिशा बदल गई थी। सड़क किनारे एक कॉलेज की छत पर उड़कर पहुंचा एक तिपहिया तो लोगों के लिए खासा हैरानी पैदा कर रहा था और लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर यहां हुआ क्या है।

अगले दिन, टाइम्स ऑफ़ इंडिया का फ्रंट पेज

उस वक्त इस नजारे को दूर से देखने वाले लोगों का कहना था कि इस हादसे से पहले मौसम एकदम साफ था। फिर अचानक जेट विमान के गरजने जैसी आवाज आई और उसके बाद सड़क पूरी तरह धूल के गुबार में बदल गई। करीब पांच मिनट बाद ही मौसम फिर से सामान्य हो गया और ऐसे लगने लगा था कि जैसे कुछ हुआ ही न हो। इस हादसे के बाद रेडियो प्रसारण ठप हो गया था, क्योंकि इस सड़क के बगल में ही आकाशवाणी का प्रसारण केंद्र था और उसके सारे टॉवर ऐसे बुरी तरह से धराशायी हुए पड़े थे, जैसे किसी ने उन्हें पकड़कर निचोड़ दिया हो। अगले दिन लोगों को समाचारपत्रों के जरिए इस बात की सूचना मिली कि उस सड़क पर तो चक्रवात आया था। लेकिन इस हादसे ने कई दिनों तक दिल्ली में अफवाहों का बाजार गरम किए रखा। कहा जा रहा था कि यह चक्रवात माल रोड से उठा था और मौरिस नगर के नाले में विलीन हो गया था। लोग हैरान थे कि अगर यह चक्रवात था, तो उसने सिर्फ सड़क को ही निशाना क्यों बनाया, वह आसपास क्यों नहीं फैला। इस चक्रवात के कारण इमारतों को ज्यादा नुकसान क्यों नहीं पहुंचा।

हादसे के बाद ली गई तस्वीर

सबसे बड़ी अफवाह जिसने दिल्ली के लोगों को रोमांचित किए रखा, वह थी कि असल में उस सड़क के बीचों-बीच दूसरे ग्रह की कोई उड़न तश्तरी उतरी थी, जिसने रिंग रोड के इस छोटे से हिस्से में ही तबाही मचाई। भयानक तेज आवाज में उतरने से पहले उसने रेडियो प्रसारण बंद कर दिया, ताकि लोगों तक उसकी जानकारी न पहुंच सके। लोग यह भी बात करने लगे थे कि वह उड़न तश्तरी कई लोगों को अपने साथ उड़ाकर ले गई। अफवाह यह भी थी कि सरकार के वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि वहां उड़न तश्तरी ही उतरी थी लेकिन उसे छिपाया जा रहा है, ताकि लोगों को किसी प्रकार की दहशत से बचाया जा सके। देश आजादी के बाद यह अलग तरह का हादसा था, जो दोबारा नहीं आया।

 

साभार : रामेश्वर दयाल
फोटो : गूगल

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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