मैं कुतुब मीनार से दोगुना ऊंची इमारत बनाऊंगा : अलाउद्दीन खिलजी

खिलजी साम्राज्य का दूसरा और सबसे शक्तिशाली राजा माने जाने वाला अलाउद्दीन खिलजी अपनी जिदंगी के कई खास मकसदों को पूरा करने में नाकामयाब रहा। भले ही चितौड़गढ़ की महारानी रहीं पदमावती को पाना अलाउद्दीन खिलजी का सबसे बड़ा सपना रहा होगा, लेकिन उसने एक सपना और भी देखा था।

मैं कुतुब मीनार से दोगुना ऊंची इमारत बनाऊंगा। यह सपना पूरा करने की कोशिश उसने की भी, लेकिन बदनसीब अलाउद्दीन खिलजी का यह सपना भी अधूरा रह गया था। महारानी पदमावती को पाने की लालसा रखने वाला एक सपना तो उसी वक्त भस्म हो गया था, जब महारानी पदमावती ने जौहर किया था।

 

क्या था पूरा सपना, क्या थी उस सपने को पूरा न होने की पूरी कहानी, आइए आपको बताते हैं।

जलालुद्दीन को सत्ता से हटाने के बाद 1296 से 1316 अलाउद्दीन खिलजी ने कुतुब मीनार के ठीक सामने उससे दोगुनी इमारत बनाने की ठानी थी। इसका काम शुरू भी हो गया था। लेकिन शायद अलाउद्दीन खिलजी की किस्मत में वो सब नहीं था, जो उसे इतिहास में महान बनाने की नींव रखने में मदद करता। अलाउद्दीन खिलजी ने मीनार का नाम “अलाई मीनार” रखवाया और काम शुरू किया गया। अलाई मीनार की पहली मंजिल भी बनाकर तैयार की गई, लेकिन अलाउद्दीन खिलजी की 1316 में मृत्यु हो जाने के बाद मीनार का काम जस का तस रह गया। आज भी यह मीनार वैसे की वैसी ही है।

 

अलाई मीनार से जुड़ी दिलचस्प जानकारी

अलाई मीनार का आकार कुतुब मीनार से मिलता जुलता है। हालांकि, दोगुनी बनाने की चाहत में अलाई मीनार की नींव भी कुतुब मीनार के आधार से दुगनी है। अलाई मीनार की पहली मंजिल 24.5 मीटर है, जबकि पांच मंजिला कुतुब मीनार की कुल लंबाई 72.5 मीटर है। यानी अलाई मीनार अगर बनकर तैयार होती, तो कुतुब मीनार से दोगुनी से भी ज्यादा बड़ी इमारत होती।

 

कुतुब मीनार की नींव कुतुबुद्दीन एबक ने रखी थी, जिसके बाद इलत्तुमीश ने इसको बनवाया। हालांकि, कुतुब मीनार के अधूरे काम को पूरा फिरोजशाह तुगलक ने किया था। जबकि अलाउद्दीन खिलजी के सपने यानी अलाई मीनार को पूरा करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। अलाई मीनार ठीक कुतुब मीनार के सामने खड़ी है। वहीं अलाई दरवाजा कुतुब मीनार के नजदीक में दक्षिणी दिशा में बना हुआ है।

कुतुब मीनार जिस परिवेश में बना हुआ है, वहां अलाउद्दीन खिलजी को दफन भी किया गया है। इसके अलावा यहां कुतुबद्दीन एबक, इलत्तुमीश का भी मकबरा है। इतिहासकारों की मानें तो, कुतुब मीनार और अलाई मीनार के बीच कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद थी। वैसे तो अलाई मीनार का आधा अधूरा काम भी पर्यटकों के लिए चर्चा का विषय बनता है। हालांकि, अगर यह मीनार बनकर तैयार हो जाती, तो दुनिया के लिए यह सबसे बड़ा दर्शनीय स्थल होता।

 

 

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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