Work From Home को परमानेंट करेंगी कंपनियां !

कोरोना महामारी ने दुनिया को हिला कर रख दिया है. महामारी से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंस और लॉक डाउन को सबसे कारगर बताया जा रहा है. ऐसे में दुनिया घरों में कैद है. लेकिन काम तो होना है. दुनिया को यूं ही ठहराया नहीं जा सकता। ऐसे में कॉर्पोरेट जगत ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठकर ही काम करने के निर्देश दिए हैं.

कहा जा रहा है कि वर्क फ्रॉम होम का तरीका कॉर्पोरेट जगत अब आगे के लिए भी अपनाने का फैसला करता दिखाई दे रहा है. सरल भाषा में कहें तो महामारी से निपटने के बाद भी कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर बैठकर ही काम करने के लिए विचार कर रही है. डिजिटल का इस्तेमाल करके एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। इसकी एक वजह फिजूल खर्च को रोकना भी बताया जा रहा है.

रिसर्च कहती है, कर्मचारी घर बैठकर ज्यादा अच्छा काम कर रहे हैं.

वर्क फ्रॉम होम पर रिसर्च भी की गई है. रिसर्च में सामने आया है कि वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठकर काम करने से एम्प्लॉयर्स यानी कर्मचारी ज्यादा प्रोडक्टिव हो गए हैं. समय का सदुपयोग करने से वो ज्यादा सही तरीके से काम कर पा रहे हैं. यह रिसर्च 1500 लोगों पर की गई थी, जो लॉक डाउन की वजह से घर बैठकर काम कर रहे हैं.

ऑनलाइन बैठकर पूछे गए सवालों के जवाब में यह भी बात सामने आई है कि आम लोग अपनी सेहत का भी खासा ध्यान रखना चाहते हैं. वो ऑफिस जाकर काम करने की बजाय घर बैठकर ज्यादा काम करने को सही मान रहे हैं. इस रिसर्च में 75 % मर्द और 25 % महिला कर्मचारियों को शामिल किया गया था. दरअसल, महिलाएं अपने घर के काम के साथ-साथ ऑफिस का काम करना ज्यादा बेहतर मानती हैं. ऐसे में यह जानना ज्यादा जरुरी होती है कि वर्क फ्रॉम होम का मर्दों पर क्या असर पड़ता है.

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि कंपनियां भी मान रही हैं कि उनके कर्मचारी ऑफिस की तुलना में घर बैठकर ज्यादा अच्छा परफोर्मे कर रहे हैं. हालांकि, कंपनियों को यह भी मानना है कि कई विभाग ऐसे होते हैं, जिनके कर्मचारियों का ऑफिस आना, फील्ड में जाना ज्यादा जरुरी होती है. ऐसे कर्मचारी बंधकर काम नहीं कर सकते। लेकिन कई कर्मचारियों का घर से भी काम शुरू किया जा सकता है. यह एक बचत भी कराती है, साथ ही सोशल डिस्टेंस भी मेन्टेन रखती है.

आपको एक बात और बता दें कि गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियां इस तरीके को पहले ही इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका मानना है कि वर्क फ्रॉम होम से कर्मचारी ज्यादा अच्छा परफॉर्म करता है और उसके दिमाग पर प्रेशर भी नहीं पड़ता.

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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