जानिए, लॉक डाउन से हमें क्या हासिल हुआ है ?

लॉक डाउन 4 आज से लागू हो रहा है. जैसा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि यह लॉक डाउन 4 अलग रंग का होगा, वैसा ही यह देखने को मिला है. 17 मई के दिन गृह मंत्रालय ने गाइडलाइन्स दी हैं, जो पहले तीन लॉक डाउन की तुलना में और भी ज्यादा कम रोक-टोक वाली हैं। गाइडलाइन्स में क्या- क्या शामिल है, वो आप हमारी खबर में सबसे नीचे देख सकते हैं, लेकिन इस खबर में हम आपको यह बताना चाहते हैं की लगातार तीन लॉक डाउन तक घर में बंद रहने से हमने कुछ न किए भी क्या हासिल किया है.

चलिए आपको बताते हैं कि कोरोना वायरस ने अगर हमें घर में बंद रहने को मजबूर किया, तो हमने उस बंद से क्या हासिल किया है.

हमने लाखों रुपए का पेट्रोल- डीजल बचाया है

बड़ा आसान लगता है कहना, लेकिन जरा सोचिये 22 मार्च से पूरी तरह बंद रहे भारत के करोड़ो लोगों ने देश का कितना पेट्रोल बचाया होगा। यह हमारी पॉकेट के लिए तो सही साबित हुआ, साथ ही कच्चे तेल की सप्लाई करने वाले देशों को दाम कम करने पर मजबूर कर दिया.

हमने कुछ वक़्त के लिए वायू प्रदुषण को बढ़ने से रोका

गाड़ी, बसें जैसे वाहनों के साथ साथ फैक्ट्रियां बंद रहने से हमने काफी हद तक वायू प्रदुषण को कम करने में सफलता पाई है. इस रोकथाम से न सिर्फ हमने धरती को बचाया है, बल्कि खुद अपने फेफड़ों तक साफ़ हवा का संचार किया है. पंजाब और बाद में सहारनपुर तक हिमालय के पहाड़ दिखना भी इसी वजह से संभव हो पाया है.

टेंशन से दूर “जी भरकर” सोए

लॉक डाउन में रहते हुए अगर लोगों ने घर बैठकर खाना-पीने का शोक पूरा किया, तो साथ ही नींद भी जमकर ली. इन दिनों सुबह उठने के बाद ऑफिस की टेंशन नहीं थी. जैसा की हमें पहले ही कहा, कोरोना ने कुछ खोया है, तो बहुत कुछ पाया भी है. आम लोग टेंशन की वजह से भी मरते हैं या बीमार रहते हैं. उनके लिए ये दिन सुखी साबित हुए.

परिवार के साथ अच्छा वक़्त बिताया

ऑफिस के सुबह निकलने के बाद और शाम को घर आते-आते हम हर वक़्त इतने भागादौड़ी में रहते हैं कि अपनों के साथ वक़्त नहीं बिता पाते. छुट्टी वाले दिन अपनी नींद पूरी करते हैं या फिर घर का कोई काम पकड़ लेते हैं. लॉक डाउन ने हमें इस परेशानी से भी दूर रखा और अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने का मौका दिया।

ख़बरों से जुड़ने का मौका मिला

आमतौर पर हमें देश और दुनिया की जानकारी बातों- बातों से पता चलती हैं. ऑफिस से आने के बाद खाना खाते हुए कुछ देख लिया तो देख लिया, वरना हम दीन-दुनिया से दूर ही रह जाते हैं. लेकिन लॉक में वक़्त ही वक़्त रहते हुए हमने देश और दुनिया की खूब जानकारियां बटोरीं. इसका ऐसे भी पता लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस के केस की पल पल अपडेट देने वाली कुछ वेबसाइट पर ट्रैफिक बहुत बढ़ा है.

साफ़ सुथरा रहना बन गई आदत

एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में कई हज़ार लोग हर साल unhygenic रहने की वजह से मरते हैं. लेकिन कोरोना ने हमें साफ़ सुथरा रहना सीखा दिया। पल पल हाथों की सफाई करने से लेकर लम्बे समय से चली आ रही मुंह में उंगली देने जैसी आदतों से भी हमें छुटकारा मिला है. साफ़ रहने के नए ढंग भी सीखें हैं. हमारा मानना तो ये भी है कि यह आदतें लंबी चलेंगी, जो पीढ़ी दर पीढ़ी भी आगे बढ़ सकती हैं.

प्रकृति ने दिखाया है अपना असली रूप

भले ही हमारा जीवन पहले की तरह हो जाए, लेकिन हमने इन दिनों में प्रकृति के साथ ऐसा पल बिताया है, जिसकी तलाश में इंसान पहाड़ों की गहराईयों में जाने की सोचता है. इन दिनों गाड़ियों के हॉर्न नहीं, सुबह सुबह पक्षियों के चह-चाहने की आवाजें आती थीं.साफ़- सुथरी हवा में रहने का अवसर मिला तो प्रदुषण कम रहने के कारण पारा ज्यादा नहीं बढ़ा.

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