कोरोना : तीन दिशा में काम होना जरूरी

भारत में कोरोना के मामले लॉक डाउन अनलॉक 01 के बाद से तेजी से बढ़ रहे हैं. जहां कोरोना की शुरूआत के बाद 1 लाख मरीज होने होने में 110 दिन लगे थे, वहीं दूसरे एक लाख होने में मात्र 15 दिन लगे. इसके बाद तीन लाख होने में मात्र 9 दिन का वक़्त लगा. ऐसे में लॉक डाउन दुबारा लगना कोई हल है ? तो जवाब होना चाहिए नहीं.

कई बड़े बड़े जानकार यह कह चुके हैं कि हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा. सोशल डिस्टेंस, मास्क और बार- बार हाथ धोना अब आदत में डालना होगा, तभी इस वायरस से जंग जीती जा सकती है. लेकिन फिर भी आज के हालात पर गौर करें तो भारत को अभी तीन मुद्दों पर पूरा जोर देना होगा।

1. सब कुछ खोलना होगा

कोरोना महामारी भारत में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सब कुछ बंद कर देना इसका उपाय नहीं है. देश लॉक डाउन होने की वजह से लाखों लोगों की नौकरी चली गई हैं. कई लाख व्यापारियों को कारोबार बंद हो गया है, तो कई व्यापार ऐसे हैं, जो अभी सही ढंग से मार्किट न खुल पाने के कारण दोहरी मार झेल रहे हैं. अपने एक्सपर्ट कारीगरों को सैलेरी देने से लेकर अपनी फैक्ट्री, दूकान, शोरूम आदि का किराया जेब से देना पड़ रहा है. टूरिज्म की बात करें या फिर रेस्तरां, धार्मिक स्थल पर निर्भर मार्किट हो या फिर हजारों – लाखों नौकरी देने वाले उद्योग बंद का नुकसान सभी को हो रहा है. उदाहरण के तौर पर वैष्णो देवी के द्वार ना खुलने की वजह से वहां मौजूद 400 ड्राई फ्रूट्स के दुकानदारों पर कोल्ड स्टोरेज का एक अलग से वजन बढ़ गया है. सेल न होने से और माल को सड़ने से बचाने के लिए उन्हें कोल्ड स्टोरेज का सहारा लेना पड़ रहा है. एक ट्रक माल के स्टोरेज में रखने का किराया 40 से 50 हजार के बीच है. इसके अलावा देश भर में जो मार्किट खुल भी गई हैं, उनमें ग्राहक वापस नहीं आ रहा है. ऐसे में सब कुछ खोल देना बेहद जरूरी है.

2. वैक्सीन पर जोर देना बेहद जरूरी

माना कि अब लोगों को घर में रोकना आसान नहीं है, लेकिन लापरवाही होने से मरने का सिलसिला खत्म नहीं होगा. ऐसे में सरकार को वेक्सीन बनाने की दिशा में काम करने वाली संस्थानों को सपोर्ट करना चाहिए. अब वो चाहे फंड हो या बुनयादी कोई मदद. होमियोपैथी से लेकर आयुर्वेद से जुड़ी संस्थानों को इसमें मदद करनी होगी, तभी वैक्सीन के लिए सकारात्मक कदम उठते हुए दिखाई दे सकते हैं.

3. आम लोगों को भी एक फर्ज निभाना है

अगर देश को सही दिशा में ले जाना है, तो खुद कई फैसले करने होंगे. खुद को सुरक्षित रखने के लिए मास्क, सेनिटाइज़र , सोशल डिस्टेंस आदि को अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाने के साथ अब घर से निकलना शुरू करना ही होगा. डरकर रहने से इस बीमारी से तो हार होगी ही, बल्कि खुद को वापस खड़े करने का बल भी नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, जितना हो सके एक दूसरे की मदद भी करनी होगी. खुद को आत्मनिर्भर भी बनाना होगा। यानी वापस लगन के साथ अपने काम को शुरू करना होगा, तभी एक एक एक के बढ़ने से देश आगे बढ़ेगा.

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