मुझमें जुनून है, मुझमें कला है – A PASSION ABLE POEM

मुझमें जुनून है मुझमें कला है
तभी तो मेरे दोस्त मुझ पर फ़िदा हैं

दुश्मनों से मुझे क्या लेना है
वो कल भी जुदा थे और आज भी जुदा है

उनमें हिम्मत नहीं की कुछ कर दिखाए
मेरा तो उनका ख़ून जलाने में ही भला है

कोशिश होती है उनकी जो बिगाड़ दे मेरा सब
लेकिन प्रिय दुश्मनों तुमसे ना होगा कुछ अब

वो जलते रहेंगे मैं चला गया हूँ इतना आगे
वो पकड़ नहीं पाएँगे चाहे जितना तेज़ भागें

नफ़रत से ज़्यादा प्यार ज़रूरी होता है
क्यूँकि इसका अंत बहुत बुरा होता है

अपने गिरेबाँ में झांकर देखो फिर कुछ कहना
मेरी ये सलाह है हमेशा याद रखना

चलो निकलो फ़्री में ज्ञान मैं नहीं देता
क्यूँकि मेरा अकाउंटेंट मेरे हर शब्द की पेमेंट लेता

– Tribhuwan sharma

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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