जानते हैं चेरापूंजी में पेड़ की जड़ों से बना 500 साल पुराना पुल है ?

  • चेरापूंजी का असली नाम सोहरा है, जिसे अंग्रेज चेरा बुलाते थे. वैसे इस इलाके को किसी भारतीय टूरिस्ट ने पहली बार चेरापूंजी पुकारा था. जिसके बाद ही इसका नाम चेरापूंजी पड़ा है. चेरापूंजी का मतलब होता है – द लैंड ऑफ ओरेंजिस यानी संतरों का शहर.

  • भारी बारिश होने के बावजूद, चेरापूंजी में पानी की कमी रहती है. यहाँ रहने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए कई मीलों दूर जाना होता है. हालाँकि, हाल ही में रेनवाटर हार्वेस्टिंग के विकास किये गए हैं, जिससे काफी हद तक मदद मिली है.

  • चेरापूंजी की संस्कृति में भी काफी अलग तौर- तरीके दिखाई देते हैं. चेरापूंजी में सबसे छोटी बेटी का पति शादी के बाद पत्नी के घर जाकर रहता है और वही परिवार की संपत्ति का मालिक होता है. इसके अलावा, चेरापूंजी में बच्चे अपनी माँ का सरनेम लगाते हैं, जबकि अन्य राज्यों में बच्चे के नाम के पीछे पिता का सरनेम लगता है.

  • चेरापूंजी में पेड़ों की जड़ों से ब्रिज बनाने का एक अलग ही चलन है. यहाँ सैकड़ों साल पुराने ब्रिज आज भी प्रयोग किए जाते हैं. कहा जाता है कि यहाँ 500 साल पुराना ब्रिज भी मौजूद है, जो पेड़ की जड़ों से बनाया हुआ है.

  • चेरापूंजी को दो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड मिले हुए हैं. साल की सबसे अधिक बारिश अगस्त, 1860 में चेरापूंजी में हुई थी, जबकि जुलाई 1861 में एक महीने के अंदर सबसे अधिक बारिश का रिकॉर्ड भी चेरापूंजी के नाम है.

 

Image Source : www.google.co.in

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