शर्त है, “कुल्लू मनाली” के बारे में इतना नहीं जानते होंगे आप

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसे मनाली का नामकरण मानवालय से उत्पन्न हुआ है। मान्यता है कि महाजल प्रलय के दौरान मनु ने ईश्वर से मनोहारी हरियाली युक्त प्रकृतिक सम्पदा की इच्छा की थी। कहा जाता है कि मनाली उनकी सोच के अनुरूप निकली।

  • मनाली की वही सदियों पुरानी प्रकृतिक सम्पदा और वातावरण अभी तक वैसा ही शुद्ध और स्वच्छ है। एक तरफ हिमालय की पर्वत माला और दूसरी तरफ कलकल बहती व्यास नदी। हरियाली और ताजापन लिए घाटियां। हरी घास की चादर लपेटे मैदान। मवेशियों के झुंड के झुंड पहाड़ी और घास के मैदान में चरते अलग ही आकर्षण पैदा करते हैं। ऐसा लगता है मानों पहाड़ी पर जगह जगह धब्बे उभर आए हों।

 

  • सेब के बाग और उस पर वहां का प्रादेशिक संगीत मंत्र मुग्ध करता है। यहां आने वाले सैलानियों के लिए यह नजारे, यह वादियां और यहां की तरोताजा आबोहवा रोमांटिक माहौल पैदा करने में सक्षम है। यहां के पुराने मंदिर और गांव विचित्र और अनोखा पन लिए हैं। रंग बिरंगे कपड़े और हैंडीक्रॉफ्ट से भरपूर लोगों का हर समय त्यौहार वाला मूड बना रहता है।

 

  • हर दम एडवेंचर की तलाश में रहने वालों के लिए ट्रैकिंग के सैंकड़ों रास्ते हैं। कुल्लू मनाली क्षेत्र के साथ लाहौल और स्पिति इलाके आसान, कम मुश्किल और कठिन ट्रैकिंग के अवसर प्रदान करते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा फेसम ट्रैक कुल्लू मनाली से राइसन-मालाना-चंद्रा खानी-राइसन, मनाली-भ्रिंगु-रोहतांग पास-मनाली, मनाली-चिखामता पास-मनाली, राइसन-पदरी-कौली, पास-गारसा-राइसन, मनाली-चंद्रताल-मनाली आदि हैं।

 

  • मनाली से 13 किलोमीटर दूर शोलांग वैली स्कीज के शौकीनों के लिए जन्नत है। यहां स्कीज के लिए बेहतर समय जनवरी से मार्च ठीक रहता है। उस समय यहां बर्फ की चादर बिछी होती है। गुलाबा ढलान स्कीज के उपयुक्त हो जाती है।

 

  • रिवर राफ्टिंग में एडवेंचर का मजा लेने वालों के लिए व्याय नदी की तेज बहाव में रॉफ्टिंग कर लुत्फ अलग ही आनंद पैदा करता है। राफ्टिंग के लिए मई से जून के मध्य तक का समय उपयुक्त रहता है। राइसन से मोहल तक रिवर रॉफ्टिंग के प्वाएंट बनाए हुए हैं। रिवर रॉफ्टिंग करने में अगर डर है तो व्यास नदी में मछलियां पकड़ का शौक पूरा किया जा सकता है।

 

  • सड़क मार्ग से पहाड़ी और जंगल के नजारे लेने के लिए जीप सफारी भी यहां मुहैया है। इसके भी कई रूट बनाए गए है। इनमें मनाली-रोहतांग पास-केलॉन्ग, लाहौल-कारगाह-पातसियो-लद्दाख, लच्छू लांग ला-रामसे-लेह, मनाली-लेह आदि के 490 किलोमिटर के रास्ते मनोहरी दृश्य अच्छा अनुभव रहेगा।

 

  • धौलाधर और पीर पंजाल रेंज के बीच में बसे मनाली की जादुई छटा हर दम अपने पास बुलाती रहती है। इसे ऐसे ही वैली ऑफ गॉड्स नहीं कहा गया है।

 

  • कुल्लू का दशहरा काफी प्रसिद्ध है। दस दिन चलने वाले इस समारोह में भगवान रघुनाथ, हडिम्बा देवी और जमलू की पूजा अर्चना की जाती है।
  • मनाली के आस पास देखने लायक जगह :-

कोठी

मनाली से 12 किलोमीटर दूर रोहतांग पास के रास्ते में लाहोल स्पिति हाई वे पर स्थित है कोठी। यहां से बर्फ से ढकी पहाड़ियों की मनोरम चोटियों और ग्लेशियर को देखना अच्छा अनुभव रहेगा।

शोलांग वैली

मनाली से 13 किलोमीटर दूर शोलांग वैली से बर्फ की चादर से ढके पहाड़ों और ग्लेशियर के नजारे अद्भुत रोमांच पैदा करते हैं। यह पैराग्लाइडिंग के लिए काफी उत्तम स्थान है। सिर्फ गर्मियों में ही पैराग्लाइडिंग करवाई जाती है। स्कींग सिखाई भी जाती है यहां। घुड़सवारी का मजा भी लिया जा सकता है। मनाली से 35 किलोमिटर दूर मरही प्रकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। रानी नाला ग्लेशियर प्वाएंट के नाम से जाना जाता है। यहां 12 महीनों बर्फ देखी जा सकती है।

नग्गर कैसल

मनाली से 22 किलोमीटर दूर नग्गर कैसल कुल्लू की पुरानी राजधानी है। इसे राजा भोसल ने बनवाया था। अब यह कैसल एचपीटीडीसी के अंडर में है और इसे होटल बना दिया गया है। सैलानियों के लिए यह काफी अच्छी जगह है। यहां चारों ओर अच्छे नजारे देखने को मिलते हैं। देवदार के पेड़ों से घिरी यहां की रोरिच आर्ट गैलरी में रूसी कलाकार की पेंटिंग्स प्रदर्शित देखने लायक है।

रोहतांग पास

मनाली से 51 किलोमीटर दूर रोहतांग पास मनाली आने वाले सैलानियों का पहला आकर्षण होता है। इस लाहौल स्पिति घाटी का द्वार भी कहा जाता है। यह रास्ता साल में सिर्फ चार महीने के लिए ही खोला जाता है। रोहतांग पास के करीब पहुंचते ही बर्फीली हवा में अलग ही ताजगी महसूस होती है।

मनीकरण

मनाली से 85 किलोमीटर दूर है मनीकरण। रोहतांग पास की ही तरह सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है। इसे शिव पार्वती वैली भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां पार्वती जी के कानों का एक बुंदा गुम हो गया था, जो बाद शिव जी ने ढूंढ निकाला था। यहां गर्म पानी का सोता (स्प्रिंग) भी हैं। कहा जाता है कि यहां की जमीन से निकलता गर्म पानी चर्म रोग और अन्य बीमारियों से निजात दिलाने में सहायक है।

मनाली में लोकल घूमने के लिए भी काफी कुछ है :-

हडिंबा मंदिर

1550 में बना हडिंबा मंदिर जिसे डूंगरी मंदिर भी कहते है। महाभारत काल में भीम की एक पत्नी हडिंबा की याद में बने इस मंदिर का आर्किटेक्चर लाजवाब है। फोर टायर्ड पगोडा लकड़ी से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। चारों तरफ से देवदार के पेड़ों से घिरा यह मंदिर शांति प्रदान करता है। इसके बराबर में ही घटोतकच मंदिर भी बनाया गया है। यह माल रोड के बहुत करीब है। यह सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसमें पहुंचने के लिए कतारबद्ध होकर बड़ी-बड़ी सीढ़ियां चढ़नी होती हैं।

वशिष्ठ मंदिर

मनाली से तीन किलोमीटर दूर व्यास नदी के मुहाने पर स्थित वशिष्ठ मंदिर गर्म पानी के चश्मों के लिए प्रसिद्ध है। यहां का मंदिर भी देखने योग्य है। पर्यटन विभाग की ओर से यहां एक स्नान परिसर बनवाया गया है जो प्राकृतिक रूप से निकले गर्म पानी से नहाने का आनंद प्रदान करता है।

मनु ऋषि मंदिर

यह भी मनाली का प्रमुख आकर्षण है। लकड़ी से निर्मित यह मंदिर मनु को समर्पित है जिसके नाम से मनाली शहर का बसना माना जाता है। लकड़ी की सोंधी गंध के बीच जब हम मंदिर का अवलोकन या दर्शन करते हैं तब हमें लकड़ी की भव्य कलात्मक इमारत दिखाई देती है। तीन सीढि़यां पार करने के बाद तोरणद्वार शुरू होता है। इसके बाद बहुत बड़ा घंटा लटका हुआ है। मंदिर परिसर से पुराना मनाली शहर दिखाई देता है। पास ही क्लब हाउस फोटोग्राफी और पिकनिक मनाके लिए अच्छी जगह है। क्लब परिसर के अंदर से ही व्यास नदी बहती है। तिब्बतन मॉनेस्ट्री भी देखने लायक जगह हैं।

माल रोड

यह मनाली का मुख्य मार्ग है। मुख्य मार्ग होने के कारण प्रत्येक पर्वतीय क्षेत्र की तरह यह भी आकर्षक है। बस स्टैंड से आरंभ होकर यह मार्ग हिडिंबा मंदिर की तरफ जाता है। खास बात यह है कि व्यास पुल के मोड़ तक मनाली की माल रोड पर काफी चहलपहल रहती है मगर उसके आगे यह चहलपहल ठहर सी जाती है। कारण यह है कि एक ओर वन विहार है दूसरी ओर आवासीय स्थल और रेस्तरां आदि। नवयुगलों की चहलपहल तो इसी तरफ देखी जा सकती है।

अर्जुन गुफा

मनाली से पांच किमी दूर महाभारत कालीन अर्जुन गुफा है। कुंती पुत्र अर्जुन ने यहां पशुपत अस्त्र प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या की थी। यहां से कुछ आगे जाने पर जगत सुख पत्थरों से बने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यह एक समय कुल्लू की राजधानी था। यहां गौरीशंकर मंदिर है जो लगभग 1200 वर्ष पुराना है।

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