रॉक गार्डन, जहां मूर्तियां बोलती हैं.

चंडीगढ़ सेक्टर-1 में बना हुआ रॉक गार्डन दुनिया भर में मशहूर है और उसके मशहूर होने की वजह है – उसका अनूठापन। टूटी-फूटी और बेकार चीज़ों के अलावा पत्थरों से तैयार किया गया यह गार्डन चंडीगढ़ की शान कहा जाता है. इस गार्डन को आप देख तो लेंगे लेकिन इसके कुछ पहलुओं से आप अछूते रह जाएंगे। जैसे, रॉक गार्डन किसने बनाया ? रॉक गार्डन बनाने के लिए क्या तरीका इस्तेमाल किया गया ? इस गार्डन को बनाने के पीछे की कहानी?

चलिए, हम आपको बताते हैं.

चंडीगढ़ में 40 एकड़ जमीन पर बना यह गार्डन साल 1976 में आम लोगों के लिए शुरू किया गया था. इस गार्डन को बनाने के पीछे एक व्यक्ति का विजन है. उनका नाम नेकचंद है. उन्हें इस रॉक गार्डन को बनाने के लिए भारत सरकार ने पदमश्री से भी सम्मानित किया था.

कौन थे नेकचंद ?

15 दिसंबर 1924 में पाकिस्तान के बरियाला कलां में हुआ था. आजादी के बाद नेकचंद चंडीगढ़ आ गए थे. उन्होंने लॉक निर्माण विभाग (PWD) में सड़क निरीक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं. सत्तर के दशक में नेकचंद सैनी ने चंडीगढ़ के किनारे में जंगलों के बीच रास्ता बनाकर एक छोटा सा बगिजा बनाया था। यहीं उन्होंने चंडीगढ़ शहर निर्माण द्वारा फेंकी गई बेकार की चीज़ों को संग्रह कर कलाकृतियों का रूप देने का ख्याल आया.

नेकचन्द ने बेकर पड़े पत्थरों से मूर्तियां बनाना शुरू किया , टूटी फूटी चीज़ों को जोड़कर कई आकार दिए. धीरे धीरे उनकी यह आकृतियां कई एकड़ जमीन पर दिखाई देने लगीं. मजेदार किस्सा यह हुआ कि नेकचंद यह काम सरकारी जमीन पर कर रहे थे, जोकि गैर कानूनी था. लेकिन नेकचंद नहीं रुके और उन्होंने रात में काम करते करते कई एकड़ जमीन पर अपनी कला का मानों भण्डार कर दिया। इस बात की खबर जब सरकार को लगी तो नेकचंद को सजा नहीं मिली, बल्कि उन्हें सम्मानित किया गया. आज चंडीगढ़ में रॉक गार्डन एक प्रमुख टूरिस्ट केंद्र बन चुका है.

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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