ऊंट किस करवट लेटेगा? पता नहीं. लेकिन हम यह कर सकते हैं.

कोरोना महामारी से लड़ रही दुनिया के सामने भविष्य अभी साफ़ दिखाई नहीं दे रहा है. बड़े बड़े शोधकर्ता इस महामारी के बाद की दुनिया को शब्दों में बयान करने में असमर्थ हैं. आर्थिक मंदी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है. लेकिन प्रकृति ने मानों प्रदुषण के चंगुल से निकलकर दुनिया को अपना असली रूप दिखाया है. पंजाब और पंजाब के बाद सहारनपुर से हिमालय की पहाड़ियां दिखाई देना। इसके अलावा गंगा नदी का पानी पीने लायक बन जाना, ये इसके उदाहरण हैं.

साधारण शब्दों में कहें तो इस महामारी के नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं, लेकिन इस बीमारी ने कई ऐसे बिंदुओं को छुआ है, जिससे हमें बहुत कुछ सीखना चाहिए। आज हम इस खबर से आपको पांच ऐसी बातें बताना चाहते हैं, जिन्हें हमें जरूर अपना लेना चाहिए, ताकि शून्य से दुबारा शुरू हो रही इस दुनिया के सामने हमारे देश का नाम सबसे ऊपर दिखाई देने के साथ-साथ हम अपने जीवन में भी सुधार कर सकें।

  • स्वदेशी सामान का प्रयोग करें

ऐसा नहीं है कि विदेशी सामान का बहिष्कार किया जाए. लेकिन कोशिश यही कीजिये कि देश में बने सामान की खरीददारी ज्यादा करें. कपड़ों से लेकर खाने-पीने के सामान, तकनिकी सामान जैसे सभी प्रोडक्ट भारत में जरूर बनते हैं. ऐसे में सोच समझकर भारतीय कंपनियों के सामान खरीदने से भारत की इकॉनमी पर अच्छा असर पड़ता है.

  • 2. अपनी खर्च की क्षमता को बढ़ाइए

कोरोना के बाद मार्किट में पैसे का फ्लो होना बेहद जरुरी है. सरकार ने इस बजट में ऐसे कई प्रयास किये थे ताकि हमारे देश की इकॉनमी भी पश्चिमी देशों की तरह खर्चीली बन जाये। इससे भारत की इकॉनमी सुधर सकती है. आप भी खर्चीले बनिए और सेविंग मोड का मोह त्याग कर अपने लिए खर्च कीजिये।

  • 3. भारत में ट्रेवल करने पर ज्यादा विचार करें

आमतौर पर लोगों में विदेश घूमने की बड़ी चाह होती है. लेकिन जिस तरह के हालात अभी दुनिया में हैं, अभी विदेश का सफर आने वाले काफी वक़्त तक मुश्किल सा ही है. ऐसे में आप देश में घूमने फिरने का ही प्लान बनाएं. भारत की इकॉनमी सुधार के लिए भी यह एक अच्छा तरीका है. भारत का पैसा भारत में ही रहेगा।

  • 4. एक निश्चित राशि के खर्च पर मोल भाव न करें

बड़े बड़े शोरूम में जाकर हजारों रुपया की शॉपिंग करने के बाद भी लोग एक रुपया भी कम नहीं करा पाते। जबकि वही लोग सब्जी वाले, रिक्शा वाले, छोटे व्यापारी से 2-2 रुपया के लिए बहस कर लेते हैं. मानों अगर यह बच जायेगा तो वो बहुत बड़ी सेविंग कर लेंगे। लेकिन इसका असर इकॉनमी पर नेगेटिव पड़ता है. अगर आप इसकी बजाए एक निश्चित राशि जैसे 100 रुपया तक मोल भाव नहीं करते हैं तो इसके दो फायदे होते हैं. पहला एक गरीब पर थोड़ा ज्यादा पैसा पहुंच जाता है, ताकि वह खुद के लिए भी कुछ अतिरिक्त खर्च कर सकते, साथ ही अपने मन को भी एक सुकून पहुंचता है. आप ऐसा करेंगे तो आपकी मानसिकता पर पॉजिटिव असर पड़ता है.

  • 5. अपनी ज़िन्दगी की अहमियत को समझें और खुद को वक़्त दें 

चाहे आप नौकरी पेशा हों या फिर व्यापारी, अपने काम करने का वक़्त निश्चित करें। हफ्ते में 5 दिन काम करने की ही प्रैक्टिस बनाएं। जबकि बाकी 2 दिन अपनी ज़िन्दगी को दें. अपने परिवार के साथ वक़्त बिताने के साथ-साथ अपनी इच्छाओं को पूरा करें. खुद के लिए कुछ करें. कुछ सीखना चाहते हैं तो उसके लिए वक़्त निकालें। उम्र इसमें कभी आड़े नहीं आती. घूमें और परिवार को घुमाएं. हां, इस बीमारी से निपटने के बाद और लॉक डाउन खुल जाने तक घर में ही रहे.

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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