KBC Mai Jeete 6.40 Lakh, Rojana Rs 5 Mai Khilaenge Bharpur Bhojan

KBC से जीते 6.40 लाख, रोजाना 5 रुपये में खिलाएंगे भरपूर भोजन!

पिछले हफ्ते बुधवार को केबीसी(KBC) यानी कौन बनेगा करोड़पति पर एक सरदार जी ने 6 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि जीती थी। कैबीसी(KBC) से जीती राशि आमतौर पर इंसान अपने खुद की डिवेलपमेंट यानी विकास के लिए खर्च करता हुआ दिखाई देता है, लेकिन इन सरदार जी ने जीते हुए पैसों से कुछ ऐसा काम करने की ठानी कि आज वो मेन स्ट्रीम मीडिया में काफी सुर्खिया बटोर रहे हैं और पूरा देश उनके इस प्रयास को सराह रहा है। इनका नाम दविंदर सिंह है और पेशे से यह एक इंजीनियर हैं।

दविंदर सिंह दिल्ली से सटे हरियाणा के शहर फरीदाबाद में रहते हैं। उन्होंने अपनी जीती रकम को उन लोगों के लिए लगाने का ठानी है, जिनके लिए पांच रुपये की कीमत भी बहुत होती है। दविंदर सिंह का परिवार पांच रुपये पर भरपूर भोजन देने का काम करता है। इनकी रसोई का नाम आप की रसोई है, जिसकी चर्चा इन दिनों देश में भर हो रही है। इन्हें फरीदाबाद में रहने वाले लोगों ने किसी न किसी नुक्कड़ पर पांच रुपये पर भरपूर भोजन खिलाते हुए काफी लोगों ने देखा है। इनोवा कार में बड़े-बड़े बर्तनों को ले जाकर वह हफ्ते में एक बार शनिवार के दिन पांच रुपये प्रति प्लेट खाना खिलाते हैं।

दविंदर सिंह बताते हैं कि केबीसी(KBC) में रकम जीतने के बाद उन्होंने अब इस प्रयास को हर दिन शुरू करने की प्लानिंग की है। केबीसी(KBC) में पहचान मिलने के बाद उन्हें मदद के लिए काफी लोगों से फोन आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से चर्चा करने के लिए वॉट्सएप ग्रुप तक बना दिया है। दविंदर सिंह ने बताया कि उनके परिवार ने यह संकल्प तब लिया, जब उन्हें दिल्ली में दो बच्चों के भूख से मरने की मौत की खबर पता चली। उन्होंने बताया कि देश की अर्थव्यवस्था दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था है, उसके बावजूद उस देश की राजधानी में अगर दो लोगों की मौत हो जाए तो इससे बड़ा चिंता का विषय कोई और नहीं हो सकता। इसलिए मेरे परिवार ने हर शनिवार पांच रुपये में भरपूर भोजन देने का फैसला लिया था।

दविंदर सिंह ने बताया कि पांच रुपये भी सिर्फ इसलिए रखे गए हैं, ताकि कोई भी व्यक्ति खाने लेने के लिए न सोचे। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति के पास पैसे नहीं होते, तो हम उस व्यक्ति से पैसे नहीं मांगते।

 

 

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त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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