विश्वास सोशल मीडिया पर केजरीवाल को भिगो-भिगो कर मार रहे हैं

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आज उन्ही के सबसे खास रहे समर्थक और जाने माने कवि डॉ. कुमार विश्वास से ऐसी सुनने को मिल रही है, जैसी शायद केजरीवाल की सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी बीजेपी के नेता भी नहीं कह पा रहे हों। हम दुश्मन इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि बाकि सभी पार्टियां तो उनके लिए अब खास हो चुकी हैं। कांग्रेस पर गला फाड़ चिल्ला चिल्लाकर पैदा हुई पार्टी इन दिनों कांग्रेस के साथ मंच साँझा करने के साथ साथ कांग्रेस से चुनाव लड़ने के लिए गले भी मिलने की पुरजोर कोशिश कर रही है। केजरीवाल ने 49 दिन की सरकार कांग्रेस के समर्थन के साथ चलाई थी और उसी कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया और दिल्ली को दुबारा चुनाव में झोंक दिया।

कुमार विश्वास एक लेखक और कवि हैं और शब्दों को चयन करने में महारथी हैं। उन्होंने इन दिनों सोशल मीडिया ट्विटर पर केजरीवाल का नाम लिए बिना शब्दों के चुन चुन कर बाण चला रहे हैं कि उनको खुद केजरीवाल भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। ज्यादातर ट्वीट में उन्होंने केजरीवाल को मंत्रमुग्द बोना कहा है।

उन्होंने आज सुबह ही लिखा है –” असुरक्षित आत्ममुग्ध बौना गिड़गिड़ा रहा है कि किसी भी शर्त पर कांग्रेस अपनी शरण में ले ले ! करोड़ों लोगों की निष्कलुष भावनाओं की हाय का प्रतिफल एक दिन इस “कायर-मनोरोगी” को पागल-विक्षिप्त कर देगा, ये तो पता था पर इतनी बेबस और गलीच हद्द तक पहुँचायेगा ये नहीं सोचा था😳 ईश्वर है😍🙏”

ऐसे ही एक और ट्वीट पढ़ लीजिए
” बौना दुस्शासन तो नैतिकता की जंघा तुड़वाए लानतों की खोह में छिपा बैठा है पर “निर्वीर्य, मित्रहंता मिडियोकर जरासंध” की जली😜 दर-दर से दुत्कारे सत्ता-पिस्सुओ,हमसे तो उस दिन माँ सरस्वती ने बुलवाया था
“आंदोलन के चीर हरण पर जो चुप पाए जाएँगे,
इतिहासों के कालखंड में सब कायर कहलाएँगे.!”

लीजिए एक और
” जिन शरद यादव ने भरी संसद में लोकपाल आंदोलन का मज़ाक़ उड़ाकर थूका था,उनसे गले मिलकर लोकतंत्र बचाने निकले,पार्टी को प्राइवेट लि० कम्पनी बना लेने वाले आत्ममुग्ध बौने को दाद देनी चाहिए क्योंकि नीचता भरा अखंड-पाखंड व इतनी नारकीय बेशर्मी शायद इस दौर के किसी राजनैतिक लंपट में इतनी नहीं “

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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