चांद तक पहुंच चुकी है दिल्ली की लाइफलाइन

कई बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें हम या तो ध्यान नहीं देते या फिर हमें बताई नहीं जातीं। चलिए आपको कुछ ऐसे मजेदार तथ्य बताते हैं, जिनको पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे। यह जानकारी दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो से जुड़ी है। हां, यह जरूर है कि यह जानकारी दिल्ली के लिए ज्यादा खास होगी, लेकिन आप भी इस जानकारी से कुछ रोचक बातें हासिल कर सकते हैं।

आइए बताते हैं ऐसे कौन सी बातें हैं, जिनको पढ़कर आप हैरान रह जाएंगे।

  • क्या आप जानते हैं कि साल 2002 में जो पहली मेट्रो चली थी, वह आज तक करीबन 30 करोड़ से अधिक किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। यानी इतनी दूरी में वह धरती से मंगल ग्रह तक करीबन चालीस बार सफर तय कर सकती है। दिल्ली मेट्रो के कुछ इसी तरह के तथ्य हम आपको बता रहे हैं, जिन्हें आप पढ़ेंगे तो हैरान रह जाएंगे।

  • दिल्ली मेट्रो विभाग के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो से साल भर में करीबन 70 करोड़ यात्री सफर करते हैं, जो कि अमेरिका की कुल जनसंख्या का दोगुना है। साल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका की जनसंख्या लगभग 35 करोड़ है।

  • एक तथ्य यह भी है कि यूनाईटेड नेशन की ओर से डीएमआरसी को खिताब दिया गया है, जिसके अनुसार दिल्ली मेट्रो दुनिया का पहला ऐसा रेलवे सिस्टम है, जिसकी मदद से साल भर में दिल्ली का करीबन 6,30000 टन प्रदूषण कम होता है।

  • आपको इस बात से भी हैरानी होगी कि करीबन 27 लाख यात्री मेट्रो में सफर करते हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो परिसर और प्लैटफॉर्म पर एक भी कूड़ेदान नहीं है। बावजूद इसके मेट्रो परिसर की साफ सफाई बरकरार रहती है।

  • एक तथ्य यह भी है कि मेट्रो में लगी हुई एस्कलेटर में साड़ी गार्ड सिस्टम होता है। यानी अगर किसी महिला की साड़ी या कोई कपड़ा एस्कलेटर में फंस जाता है, तो एस्कलेटर तुरंत रुक जाएगी, ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।

  • इतना ही नहीं, दिल्ली मेट्रो गरीब बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य के लिए भी काम करती है। तीस हजारी पर मेट्रो प्रशासन ने एक स्कूल शुरू किया हुआ है, जहां सलाम बुक ट्रस्ट नाम की एनजीओ के साथ गरीब बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया जाता है।

Image Source : www.jeffbullas.com

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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