प्रदूषण से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े, खत्म हो रही हैं प्रजातियां

जरा सोचिए और समझने की कोशिश कीजिए कि दुनिया किस कदर खतरनाक प्रदूषण से घिर रही है। हमने आपको पिछली खबर में बताया था कि दुनिया की आवोहवा इतनी खराब हो चुकी है कि डब्लूएचओ ने हवा को ही दुनिया के लिए नया तंबाकू तक कह दिया है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही जानकारी देने जा रहे हैं। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है कि समुंद्र से जुड़ी जिंदगियां 90 प्रतिशत प्लास्टिक प्रदूषण का शिकार हो रही हैं।

एक  रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पता चला है कि 90 प्रतिशत समुंद्री पक्षियों के पेट में प्लास्टिक मौजूद है। यह संख्या 1960 में 5 प्रतिशत थी। इसके अलावा इंसान यानी हमारे द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा प्रयोग करने की वजह से दुनिया की वाइल्डलाइफ यानी जंगली पशु-पक्षियों की संख्या साल 1970 की तुलना में 60 प्रतिशत तक कम हो चुकी है।

इतना ही नहीं, इंसानों की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए Living Planet Report की रिपोर्ट में सामने आया है कि अभी इंसानी जिंदगी धरती की एक चौथाई जमीन पर नहीं है, जोकि बढ़कर साल 2050 में धरती पर दसवां हिस्सा हो जाएगा।

किन जानवरों पर पड़ा है सबसे असर

  • डब्लूडब्लूएफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Hedgehog हैजहॉग की जनसंख्या साल 2002 से 2014 के बीच 75 प्रतिशत तक खत्म हो चुकी है।

 

  • अफ्रीकन तोता की जनसंख्या लगभग 98 प्रतिशत तक खत्म हो चुकी है। साल 1992 से 2014 के बीच के इनकी जनसंख्या में तेजी से कमी दिखाई दी है।

 

  • पिछले 75 साल के आंकड़ों में व्हेल मछली की संख्या में भी कमी आई है। पूरी धरती पर 50 प्रतिशत कमी आई है, जबकि इंडो-पैसिफिक महासागर में यह संख्या घटकर 63 प्रतिशत तक हो चुकी है। अटलांटिक महासागर में यह संख्या 30 प्रतिशत तक कम हो चुकी है।

 

  • अफ्रीकन हाथी की भी संख्या साल 2009 की तुलना में 2014 तक 60 प्रतिशत तक कम हो चुकी है।

 

  • ऐसे ही बर्फीली इलाकों में पाए जाने वाले पोलर बीयर की जनसंख्या साल 2050 में 30 प्रतिशत तक कमी आ जाएगी। पोलर बीयर सील का शिकार करते हैं। ऐसे में अंटार्कटिका की बर्फ ज्यादा पिघलने से सील का शिकार कम हो जाएगा।
Image & Content Source : www.dailymail.co.uk

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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