Alauddin Khilaji Ke Karur Vayvahaar Ki Aankhon-Dekhi Imaarat- Night Bulb

अलाउद्दीन खिलजी के क्रूर व्यवहार की आंखों-देखी इमारत

पदमावत फिल्म से आप अलाउद्दीन खिलजी की हरकतों से वाकिफ तो हो ही गए होंगे। लेकिन फिल्म में तो उसकी जिंदगी का मात्र एक हिस्सा ही दिखाया गया है। अलाउद्दीन खिलजी दुनिया के क्रूर शासकों में से एक था। उसकी क्रूरता न सिर्फ अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए थी, बल्कि उसके रहम पर जी रहे साम्राज्य के लिए भी दिखाई देती थी। अगर आप उसके इतिहास को खंगालें तो रूह कांपने वाली दरिंदगी से जुड़ी जानकारियां आपको जरूर मिल जाएंगी। पदमावत में चित्तोड़गढ़ की महारानी पदमावती को लेकर खिलजी के एक फैसले से जुड़ा एक हिस्सा आपने देखा ही है, अब हम अलाउद्दीन खिलजी के एक ऐसे ही क्रूरता को दर्शाने वाली एक ऐसी इमारत के बारे में बताते हैं, जिसके बारे में पढ़कर आपको हैरान रह जाएंगे।

अपारधियों के लिए बनाई थी खिलजी ने चोर मीनार, आज भी है मौजूद

चोर मीनार को खिलजी ने 13वीं सदी में बनवाई थी। अलाउद्दीन खिलजी ने 1290 से 1320 के बीच राज किया था। यह इमारत हौजखास में आज भी मौजूद है। यह एक ऐसी इमारत है, जो आज भले ही सिर्फ एक इमारत के तौर पर रह गई है, लेकिन किसी समय में आम लोगों के मन में यह डर बनाए रखने का काम करती थी। चोर मीनार से मतलब यह नहीं कि इस इमारत में चोरों को बंदी बनाकर रखा जाता था या फिर इमारत चोरों का अड्डा था, बल्कि चोरों की गर्दनों को काटकर इस इमारत पर टांग दिया जाता था।

कारागार में डालने की बजाय खिलजी ने यूं सजा देने का लिया था फैसला

यह इमारत अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में सिर्फ इसलिए बनाई गई थी कि कानून को हाथ में लेने वालों को सुधारा जा सके। दरअसल, उस वक्त जेल में डालने की बजाय खिलजी ने सजा देने के लिए यह तरीका इजात किया था। आप इस इमारत को देखेंगे तो इस इमारत में हर जगह छोटे – छोटे छेद दिखाई देंगे। इसमें कुछ मिलाकर 225 छेद हैं। ये छेद ही इमारत की अहम पहचान हैं। इन्हीं में अपारधियों की गर्दन लटकाई जाती थी।

क्रूर खिलजी की क्रूरता से खुद उसका साम्राज्य भी डरता था

कहा जाता है कि इस इमारत पर गर्दन उन अपराधियों की लटकाई जाती थी, जो गंभीर आरोपों में पकड़े जाते थे। खिलजी ऐसा इसलिए करता था, ताकि भविष्य में अपराध करने से पहले कोई भी सौ बार सोचे। इतिहासकारों का मानना है कि अलाउद्दीन खिलजी यह भी चाहता था कि इस इमारत से उसकी जनता में एक डर यह भी बना रहे कि अगर कोई उसके शासन पर उंगली उठाएगा, तो उसका अंजाम बुरा ही होगा।

देखना चाहते हैं इमारत तो यहां जाएं

यह इमारत खिलजी की सबसे छोटी इमारतों में से एक माना जाए, तो कहना गलत नहीं होगा। यहां जाने के लिए आप मेट्रो का प्रयोग कर सकते हैं। मेट्रो के जरिए आपको पहले हौज खास मेट्रो स्टेशन उतरना होगा। मेट्रो स्टेशन से यह इमारत चंद कदमों की दूरी पर बनी हुई है। अगर आप अपने वाहन से जाना चाहते हैं, तो आप नई दिल्ली के अरबिंदों मार्ग से रिहायशी इलाके में जांएगे, तो यह इमारत आप देख पाएंगे। स्मार्टफोन के जरिए नेविगेशन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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