Single Screen Theater Se Juri Kai Aanokhi Kahaniya I Night Bulb-Hindi

इतिहास बन चुके दिल्ली के सिंगल स्क्रीन थिएटर की कहानियां

सिंगल स्क्रीन थिएटरों से जुड़ी कई अनोखी कहानियां

एक वक्त था, जब दिल्ली में सिंगल प्लेक्स थिएटर में फिल्में देखने के लिए लंबी लाइनें लगी होती थीं। दो-तीन घंटे पहले जाकर फिल्म की टिकट लेनी पड़ती थी, ताकि भीड़ बढ़ने पर कोई परेशानी न हो। इन थिएटरों पर भीड़ इतनी होती थी कि समय पर आने से टिकट मिलने की गारंटी नहीं होती थी। तब दिल्ली में इतने सिनेमाघर भी नहीं बने थे। ऐसे में आम लोगों के साथ- साथ थिएटर पर बड़ी-बड़ी हस्तियों का भी आना जाना लगा रहता था। हमारे पास कुछ यादे हैं, जो हम आपके साथ शेयर करना चाहते थें। चलिए बताते हैं-

पुरानी दिल्ली में थे 7 सिनेमाघर

1940 के दशक में पुरानी दिल्ली में सात सिनेमा घर हुआ करते थे। तब आम लोगों में सिनेमाघर को ‘बॉयो स्कोप’ कहा जाता था। जबकि सिनेमाघरों के अपने अलग-अलग नाम थे। मसलन रिट्ज, नॉवेल्टी और कुमार टॉकीज। इसके अलावा इन्हें इलाके से भी पहचाना जाता था। जैसे कुमार टॉकीज को पत्थरवाला, तो जगत सिनेमा को मछलीवाला कहते थे।

अनुपम सिनेमा था पहला मॉर्डन मल्टीप्लेक्स

दिल्ली का सबसे पहली मॉर्डन मल्टीप्लेक्स साउथ दिल्ली का अनुपम सिनेमा था, जिसे 1997 में पीवीआर का रूप दिया गया था। मॉर्डन होने के बाद अनुपम सिनेमा ने दर्शकों की संख्या का नेशनल रिकॉर्ड भी तोड़ दिया था।

डिलाइट : नेहरू, इंदिरा भी फिल्म देख चुके हैं

डिलाइट सिनेमा को 1955 में बनाकर तैयार किया था, तब इस बिल्डिंग को दिल्ली की सबसे बड़ी बिल्डिंग में शुमार किया गया था। डिलाइट सिनेमा में जवाहर लाल नेहरु, देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी जैसे राजनेताओं से लेकर अभिनेता दिलीप कुमार, अशोक कुमार, देव आनंद, नूतन और मधुबाला भी फिल्म देख चुके हैं। डिलाइट सिनेमा में कई नेशनल और इंटरनेशनल थिएटर भी प्ले किए जा चुके हैं।

बंद होने का कारण

दरअसल, मल्टीप्लेक्स थिएटरों ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है। सुविधाओं के अलावा एक से अधिक फिल्में एक साथ लगे होने से चुनने का मौका मिलना भी सिनेमा के चहेतों को मल्टीप्लेक्स की ओर खींच लाता है। जब टॉकीज बंद हुए थे, तो प्रमुख में यह भी एक कारण था कि जहां मल्टीप्लेक्स में एसी और बड़ी स्क्रीन की सुविधा थी, तो वहीं इन टॉकीज पर पंखे व पुराने स्ट्रक्चर होने के चलते लोगों ने कम रुचि लेना बंद कर दिया था।

बंद हुए सिनेमा घरों की कहानी

जगत सिनेमा

जगत सिनेमा जामा मस्जिद इलाके में बना हुआ था, जिसे साल 2004 में बंद कर दिया गया। वजह सिर्फ यही थी कि मल्टीप्लेक्स का जमाना हैऔर दिल्ली वालों ने इन सिनेमा घरों में आना बंद कर दिया था।

नॉवेल्टी सिनेमा

एक जमाने में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड में अपनी रौनक बनाए रखने वाला नॉवेल्टी सिनेमा भी मल्टीप्लेक्स के सामने अपने यहां दर्शकों को आकर्षित करने में सफल नहीं हो पाया। करीबन 13 साल से यह सिनेमा हॉल बंद पड़ा है। कहा जाता है कि बॉलीवुड की सबसे मशहूर फिल्मों में गिनी जाने वाली शोले यहां 75 सप्ताह तक लगातार हाउसफुल चली थी।

अमर सिनेमा

पुरानी दिल्ली के मशहूर सिनेमाघरों में एक अमर सिनेमा भी था, जहां अब चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन है। कहा जाता है कि यह सिनेमा घर मेट्रो कंस्ट्रक्शन के समय गिरा दिया गया था, लेकिन असल में सिनेमा घर पहले ही बंद हो चुका था।

मैजेस्टिक सिनेमा

लाल किला के सामने चांदनी चौक की सड़क पर कभी लंबी लाइन में टिकट खरीदकर मैजेस्टिक सिनेमा घर में फिल्म देखी जाती थी। लंबी लाइन से कभी कभार अच्छी खासी भीड़ दिखाई देती थी। हालांकि, आज उस जगह भीड़ रिक्शा व अन्य वाहनों की दिखती है। मैजेस्टिक सिनेमा घर बंद हो चुका है और अब यहां सिख म्यूजियम है।

जुबली सिनेमा

वॉल्ड सिटी में एक और सिनेमा हॉल यही जुबली सिनेमा हुआ करता था जो कि अब कई तरह के सामान की दुकानों में तब्दील हो गया है।

मिनर्वा सिनेमा

लोथियन रोड स्थित सिनेमा हॉल की बिल्डिंग के अब तो मात्र अवशेष ही बचे हैं। लेकिन यहां एक जमाने में फिल्म देखने वालों का तगड़ा जमावड़ा लगा करता था।

फिल्मीस्तान सिनेमा

बर्फ खाने से कुछ ही कदमों की दूरी पर यह सिनेमाघर हुआ करता था। यह सिनेमा घर अब बंद हो चुका है। बाकी सिनेमाघर की तुलना में इस सिनेमा घर की बिल्डिंग आज भी जस की तस खड़ी है। फर्क सिर्फ इतना है कि वह अब गुमसुम है।

Image source: mediaindia.edu

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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