तब जाकर लगी भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर

नोटबंदी की चर्चा दिल्ली की संसद के साथ- साथ पुरानी दिल्ली की गलियों तक आज भी गूंजती हुई दिखाई देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नोटबंदी के अलावा कई अन्य कहानियां-किस्से भारत के इतिहास में दर्ज हैें, जो भारतीय नोट से जुड़े हैं। इन्हें पढ़कर आपको न सिर्फ हैरानी होगी, बल्कि कुछ नया पढ़ते हुए अच्छा भी लगेगा। आज हम आपको भारत के इतिहास में नोट की परंपरा शुरू होने से लेकर हुए विभिन्न बदलावों को बताने जा रहे हैं। आइए जानिए यह 10 बातें, जो भारतीय नोट से जुड़ी हैं।

  • भारत में पहली बार नोट नाम की मुद्रा का चलन साल 1861 से शुरू हुआ था। यह मुद्रा सबसे पहले ब्रिटिश साम्राज्य ने पेपर करेंसी एक्ट 1861 के तहत हासिल की थी। इसके बाद पूरे भारत में एक ही मुद्रा चलाने पर ब्रिटिश शासन का अधिकार हो गया था। इससे पहले राजा-महाराजा भी अपनी मुद्रा चलाते थे।

 

  • सबसे पहले नोट विक्टोरिया सीरिज के शुरू किए गए। इनमें 10, 20, 50, 100 और हजार के नोट बनाए गए। इस सीरिज के नोट में दो भाषाएं प्रयोग की गई थीं।

 

  • 5 रूपये के नोट को आम लोगों की डिमांड के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने जारी किया था। यह नोट अंडरप्रिंट सीरिज में शुरू किया गया था, जिसमें किसी भी शख्स की तस्वीर छापी नहीं गई थी। यह नोट 1911 में लाया गया था।

 

  • लगातार चल रहे अंडरप्रिंट सीरिज के बाद ब्रिटिश शासकों ने फिर नोट की तस्वीर बदलने का फैसला किया। साल 1923 में उन्होंने George V की तस्वीर के साथ दस रुपये का नोट जारी किया।

 

  • गर्वमेंट ऑफ इंडिया के नाम से नोट साल 1935 तक छापे गए। इसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई और नोट पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया छपना शुरू हुआ।

 

  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बाद 5, 10, 50, 100 रुपये के नोट के बाद 500, 1000 और 10,000 रुपये के नोट भी छपने शुरू हुए। इसके अलावा स्वतंत्रता तक George VI की तस्वीर के साथ छपते रहे।

 

  • 1947 से लॉयन सीरिज (Lion Series) के नोट की शुरूआत की गई। इस सीरिज के नोट पर अशोक के चर्तुर्मुख सिंह की तस्वीर को शुरू किया। यह तस्वीर सभी नोट पर लगाई गई, जिनमें 1 रुपये के नोट से लेकर 100 रुपये तक सभी नोट शामिल थे।

  •  महात्मा गांधी की तस्वीर वाले नोट की शुरूआत साल 1996 में की गई थी। महात्मा गांधी सीरिज के नोट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शुरू किए गए थे।

 

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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