Ravratro Mai Varat Karna Kyu Hai Jaruri, Jaane Vaigyanik Karan

नवरात्रों में वृत रखना क्यूं हैं जरूरी, जानें वैज्ञानिक कारण

नवरात्रों के दिनों में वृत रखना आम बात है। यह वृत धार्मिक तौर पर रखे जाते हैं। हालांकि, यंग लोग इन वृतों से दूरी बनाकर रखते हैं। कुछ कहते हैं कि जब वे बड़े हो जाएंगे, तब वृत रखेंगे। कुछ कहते हैं, धार्मिक तौर पर वृत रखना कोई समझदारी नहीं है। लेकिन क्या आप जानते हैं धार्मिक तौर पर रखे जाने वाले वृत यानी फास्ट काफी लाभकारी होते हैं। हिंदू धर्म में तो इन वृत के पीछे वैज्ञानिक उदाहरण भी आपको मिल जाएंगे। आज हम आपको उपवास, वृत या फिर कहें फास्ट के वैज्ञानिक लाभ बताएंगे, ताकि आप समझ सकें कि यह हमारी जिंदगी के लिए आखिर क्यूं हैं इतने महत्वपूर्ण।

  • 100-200 साल पहले की बात करें, तो पता चलता है कि उस वक्त विज्ञान आज की तुलना में भले ही कम था, लेकिन इंसान आज की तुलना में ज्यादा स्वस्थ था। आज छींक भी एक बिमारी बन चुकी है।

  • बारिश के दिनों में अनेक सब्जियां सड़ती हैं, जिसके बाद उनमें कीड़े पड़ते हैं। तालाब, नदी आदि का पानी प्रदूषित हो जाता है। जिस कारण मच्छर, कीड़े-कीट पैदा होते हैं। यही वजह हैं कि शरद ऋतु में धार्मिक वृतों होते हैं। यानी यह नवरात्रे हर साल इन्हीं दिनों में इसी वजह से शुरू किए जाते हैं।

  • संस्कृत में कहा जाता है- वैद्यानां शारदी माता पिता च कुसुमाकर:। यानी डॉक्टरों के लिए शरद ऋतु लाभकारी होती है। इन्हीं दिनों में बुखार, मलेरिया, पीलिया आदि बीमारियों से इंसान सबसे ज्यादा परेशान होता है। यही बीमारियां बड़ी आसानी से हो भी जाती हैं। इस वजह से भी यह वृत रखने महत्वपूर्ण होते हैं।

  • वृत रखने की तीन वजह होती हैं – शारीरिकख् मानसिक और आध्यात्मिक। वृत यानी फास्ट से दमा, मोटापा, कब्ज, बवासीर, अपेंडिसाइटिस, गठिया जैसे रोगों से बचा जा सकता है।

  • आयुर्वेद के प्रसिद्ध महर्षि चरक कहते हैं कि उल्टी, बुखार, शरीर का भारीपन, जी मिचलाना, आदि हल्की फुल्की परेशानी से निपटने का भी तरीका वृत यानी उपवास में है।

  • वृत से बल्ड का सर्कुलेशन बना रहता है, जिससे शारीरिक और दिमाग को एनर्जी मिलती है। इसके अलावा दिमाग को शांति, शरीर में सुंदरता जैसे लाभ भी होते हैं।

  • अगर हम आपको एक उदाहरण के तौर पर समझाएं, तो आपको पता चलेगा कि जैसे एक सड़क पर इनक्रोचमेंट यानी अतिक्रमण करने से सड़क संकरी हो जाती है। वैसे ही रोजाना पेठ पर खाना- खाने से शरीर के अंदर की स्थिति भी कुछ ऐसी ही हो जाती है। बल्ड का सर्कुलेशन धीमा हो जाता है और शरीर को पोषण नहीं मिल पाता।

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