जानिए किसने बनाई “Statue Of Unity”

आज पूरे भारत देश के लिए गर्व का दिन है। दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा भारत में बनाकर तैयार की गई है, जिसका उद्घाटन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे हैं। भारत के पहले गृहमंत्री और लोह पुरुष कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा “Statue Of Unity” 182 मीटर की है, जोकि लंदन की प्रसिद्ध स्टेचू ऑफ लिबर्टी से दोगुनी है। दिल्ली में मौजूद कुतुब मीनार से ढाई गुना पटेल की यह प्रतिमा चाइना में मौजूद स्टेचू ऑफ बुद्धा से भी 30 मीटर बड़ी है। स्प्रिंग टेंपल ऑफ बुद्धा प्रतिमा की कुल लंबाई 153 मीटर है।

यह सारी जानकारी आपको पता होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह प्रतिमा किसने तैयार की? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इतनी बड़ी प्रतिमा को बनाने वाले शख्स की उम्र 93 वर्ष है। आइए आपको बताते हैं कौन हैं वे शख्स।

भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस विशालकाय प्रतिमा का पूर्ण रूप देने वाले कोई और नहीं 93 वर्षीय पदमभूषण राम सुतर जी हैं। वैसे तो राम सुतर जी अपने कला में इतने निपुण हैं कि उन्हें साल 1999 में पदमश्री से सम्मानित किया गया, जिसके बाद उन्हें भारत सरकार द्वारा साल 2016 में पदमभूषण दिया गया। लेकिन ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है, जब 93 वर्ष की उम्र में किसी शख्स ने इतनी बड़ी मूर्ति को बनाकर तैयार किया हो। बनाना तो दूर की बात है, ऐसी मूर्ति को डिजाइन करने के लिए भी एक स्कल्पचर को 100 बार सोेचना पड़ सकता है।

राम सुतर जी का जन्म महाराष्ट्र के धुलिया जिले में 19 फरवरी 1925 को हुआ था। राम सुतर जी ने प्रतिमा बनाने की शुरूआत मध्यप्रदेश के चंबल इलाके से की। यहां राम सुतर जी ने 45 फुट ऊंची चंबल देवी की प्रतिमा को बनाकर तैयार किया। इतना ही नहीं, सुतर जी ने महात्मा गांधी की एक ऐसी प्रतिमा को बनाकर तैयार किया, जिसे आज देश भर ही नहीं, बल्कि फ्रांस, लंदन, अर्जेंटीना, इटली और रूस में भी कॉपी किया गया। राम सुतर जी ने अपने 40 साल के आर्टिस्ट के करियर में 50 से भी अधिक प्रतिमाओं को बनाकर तैयार किया है।

प्रसिद्ध अखबार में काम कर चुके फाइन आर्ट के आर्टिस्ट उमाशंकर बताते हैं कि एक आर्टिस्ट को 10 से 15 फुट ऊंची इंसान की प्रतिमा बनाने में भी काफी वक्त लगता है। ज्यादातर आर्टिस्ट हूबहू प्रतिमा बनाने में नाकामयाब हो जाते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी प्रतिमा को बनाने के लिए राम सुतर जी का जवाब नहीं। यह अपने आप में एक रिसर्च बन जाएगी। खुद स्कल्पचर बनाने वालों के लिए यह ज्ञान का विषय होगा।

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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