Aishe Jaane, Aapse Kon-Kon Bolta Hai Jhuth | NightBulb.in

ऐसे जानें, आपसे कौन-कौन बोलता है झूठ

आमतौर पर हम किसी के झूठ को पता लगाने में इतनी दिलचस्पी उस वक्त नहीं लेते, जब आपके सामने खड़ा शख्स आपसे झूठ बोल रहा हो। चाहे वो कोई अंजान हो या फिर आपका लाइफ पार्टनर। दरअसल, हमारे पास झूठ समझने की कोई कला ही नहीं होती। लेकिन सोचिए अगर आपको झूठ पकड़ना है, ताकि आप अपने भविष्य के लिए सचेत रह सकें, तो आपको जरूर जानने की उत्सकुता होगी कि कैसे? चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे आप सामने वाले शख्स का झूठ पकड़ सकते हैं।

साइकोलॉजिकल साइंस कहती है कि आपको किसी अंजान के झूठ को पकड़ने के लिए भी उसकी पर्सनल जानकारी, व्यवहार आदि को जानना भी जरूरी नहीं होता। आपको सिर्फ इंसान की बॉडी लैंग्वेज समझने की जरूरत है कि वह बहाने, झूठ या सफाई किस अंदाज में दे रहा है। जैसे आम तौर पर झूठ बोलते वक्त ज्यादातर लोग अपनी पलके झपकाते हैं।

एक दोस्त के झूठ को ऐसे जानें

हम आपने दोस्त की हरकतों को अच्छे से जानते हैं। उसके हंसने का तरीका, आंखों से बात करने का समय, चेहरे का भाव आदि जैसी जानकारी हमारे लिए सामान्य होती है। ऐसे में इन तौर-तरीकों से हटकर आपको अपने दोस्त को उसके मूड से जानें। खासतौर पर उस वक्त, जब वह आराम की स्थिति में हो। दरअसल, आराम की स्थिति में बनावट काफी कम की जाती है, जिससे आप अपने दोस्त के असली भाव को समझ सकते हैं। इसे बार-बार पलके झपकाना, आपसे आंख न मिलाना, होठों को बार-बार जीब से गीला करना जैसे अलग-अलग ढंग आपको झूठ और सच का अंतर बता सकते हैं।

आपके ऑफिस के सहपाठी(Colleague) का झूठ

दोस्त के बाद अगर कोई नजदीक होता है, तो वो आपके ऑफिस में आपके साथ काम करने वाला सहपाठी होता है, जो अपने चेहरे में झूठ का मास्क पहनकर आपका चकमा देता है या दे सकता है। दरअसल, प्रोफेशनल जिंदगी में लोग अपनी पर्सनल फीलिंग यानी स्वभाव को छुपा कर रखना बेहतर मानते हैं। ऐसे में आपको सबसे पहले अपने वर्किंग पार्टनर की बॉडी लैंग्वेज को समझना जरूरी है। इसमें चेहरे के भाव काम नहीं आते। इसमें कंधे हिलाना, हाथों का ज्यादा इस्तेमाल करना जैसे व्यवहार शामिल होते हैं। अगर आपका वर्किंग पार्टनर बोलते वक्त आम दिनों की तुलना में तेज या धीमा बोल रहा है, तो भी आप समझ सकते हैं कि वह कुछ न कुछ आपसे छुपा रहा है। वर्किंग लाइफ में झूठ को बॉडी लैंग्वेज से ही पता लगाया जा सकता है।

आपका पार्टनर यानी जिंदगी का हमसफर भी झूठ बोलता है

अंत में सबसे खास और सबसे नजदीक शख्सियत को जानना सबसे जरूरी है। जिंदगी का सवाल हो, तो पार्टनर के झूठ को भी पकड़ना जरूर आना चाहिए। जितना करीब होता है लाइफ पार्टनर, उतना ही मुश्किल होता है उसके झूठ को पकड़ना। दरअसल, इसमें हमारा दिमाग ज्यादा काम नहीं करता। हम सिर्फ यही सोचने के लिए दवाब डालते हैं कि वह जो भी बोल रहा है, सब सच बोल रहा है। लेकिन झूठ पकड़ना नामुमकिन भी नहीं है। जैसे आपको व्यवहार में सबसे ज्यादा अंतर देखने को मिलता है, तो समझ लीजिए कि कहीं न कहीं झूठ तो बोला ही जा रहा है। आंखें न मिलाना और गहरी सोच में डूब जाते वक्त भी बातचीत में झूठ बोलने के ज्यादा चांस होते हैं।

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Content Source : www.dailymail.co.uk

त्रिभुवन शर्मा ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत द टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के हिंदी अख़बार "सांध्य टाइम्स" के साथ साल 2013 में की थी. 4 साल अख़बार में हार्डकोर जर्नलिज्म को वक़्त देने के बाद उन्होंने Nightbulb.in को 2018 में लॉन्च किया

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